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सिंहल की जिंदगी से जुड़ी कई बातें जो आप नहीं जानते होंगे

Wed, 18 Nov 2015 04:04 AM IST
Updated Wed, 18 Nov 2015 04:04 AM IST
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सिंहल की जिंदगी से जुड़ी कई बातें जो आप नहीं जानते होंगे

Ashok Singhal's was good singer, see his life in picture.

ओजस्वी वक्ता और हिंदुत्व की पहचान अशोक सिंहल संगीत के भी महान साधक रहे। बुलंद आवाज के धनी सिंहल के गीत राष्ट्र भक्तों के भीतर ऊर्जा का संचार करते रहे। उनके करीबियों को सन् 1970 का वह दिन अब भी याद है जब उनकी ओर से प्रस्तुत वंदेमातरम गीत पर वक्त जैसे ठहर सा गया था।

सिंहल की जिंदगी से जुड़ी कई बातें जो आप नहीं जानते होंगे

Ashok Singhal's was good singer, see his life in picture.

उस समय आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन में मौजूद एक लाख स्वयं सेवकों की भीड़ उनके गीतों पर पूरी तरह से मुग्ध हो गई थी। सिर्फ सिंहल की आवाज में वंदेमातरम की गूंज थी और पूरा माहौल राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत। संगीत के प्रति उनके प्रेम का ही नतीजा था कि सिंहल के गीतों का एक कैसेट भी तैयार किया गया।

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर राजाराम यादव का कहना है, ‘सिंहलजी ने मुझे संगीत सिखाया है। उनके निर्देशन में अनेकों स्वयं सेवकों ने संगीत की साधना की है। मेरे लिए तो वो सब कुछ रहे।’ उन्होंने बताया कि शास्त्रीय संगीत के प्रति अशोक सिंहल की बचपन से ही रुचि रही।

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राष्ट्रीय स्वयं संघ के कई गीतों की लय सिंहल ने ही बनाई है। उनके गाए गीतों का कैसेट भी है, जिसे संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में सुनाया जाता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ.नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने बताया कि पूर्व सर संघचालक डॉ.राजेंद्र सिंह रज्जू भइया और अशोक सिंहल संघ के कार्यक्रमों में गीत प्रस्तुत करते थे। उनकी आवाज स्वयं सेवकों के लिए प्रेरणादायी होती थी। ‘शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है’ गीत वह हमेशा गाते थे। ‘चरण कमल पर माता तेरे प्राणों का संगीत न्यौछावर’ गीत भी वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में अक्सर गाया करते थे। इन गीतों को उन्होंने खुद के जीवन में भी उतारा।

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विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल जीवन भर स्वयं को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समर्पित प्रचारक ही मानते रहे। नब्बे के दशक में जिस वक्त श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था, सिंहल की गरजना से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे। अशोक सिंहल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। घर में धार्मिक वातावरण के कारण उनके मन में बचपन से ही हिन्दू धर्म के प्रति प्रेम जागृत हो गया। घर पर संन्यासी और धार्मिक विद्वान आते रहते थे। उन्होंने कक्षा नौ में महर्षि दयानंद सरस्वती की जीवनी पढ़ी। उससे उनका देश के हर क्षेत्र में संतों की समृद्ध परम्परा एवं आध्यात्मिक शक्ति से परिचय हुआ।

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