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भारत के परमाणु कार्यक्रम के 5 दावे, सच हैं या झूठ?

Mon, 16 Nov 2015 11:53 AM IST
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:53 AM IST
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भारत के परमाणु कार्यक्रम के 5 दावे, सच हैं या झूठ?

5 myths of indian nuclear programme

भारत के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी चुनिंदा नौकरशाहों, वैज्ञानिकों और सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के पास होती है। इस गोपनीयता से भारत के परमाणु कार्यक्रम के बारे में कई तरह की भ्रांतियां भी हैं। क्या है भारत के परमाणु कार्यक्रम के बारे में 5 मिथक-

भारत के परमाणु कार्यक्रम के 5 दावे, सच हैं या झूठ?

5 myths of indian nuclear programme

1. भारत के पास भरोसेमंद परमाणु क्षमता है। 2003 में भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने परमाणु नीति की घोषणा की थी। इसमें कहा गया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए न्यूनतम परमाणु क्षमता विकसित करेगा। यह केवल एक दिखावा था, चीन और पाकिस्तान दोनों ही देशों के होते हुए भारत न्यूनतम सुरक्षा विकसित नहीं कर सकता। चीन के सामरिक महत्व के केन्द्र देश के सुदूर पूर्वी इलाके में है। चीन एक बड़ी परमाणु शक्ति वाला देश है।

भारत के परमाणु कार्यक्रम के 5 दावे, सच हैं या झूठ?

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इसका मतलब है कि पाकिस्तान के खिलाफ़ भारत को जितनी परमाणु शक्ति की ज़रूरत है, उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरत चीन के विरूद्ध है। लोगों का मानना है कि पाकिस्तान के मुक़ाबले चीन के विरूद्ध भारत को बेहतर तैयारी की ज़रूरत है। यह भी माना जाता है कि पाकिस्तान के प्रति भारत के लिए मुद्दा न्यूनतम ज़रूरतों का नहीं है।

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भारत के परमाणु कार्यक्रम के 5 दावे, सच हैं या झूठ?

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2. ऐसा माना जाता है कि भारत की परमाणु शक्ति अलग-अलग टुकड़ों में अलग-अलग असैनिक एजेंसियों के पास है। लेकिन यह एक बड़ा मिथक है। भारत अपनी परमाणु शक्ति का एक हिस्सा हमेशा तैयार रखता है। इसे किसी भी समय ज़रूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिहाज से तैयार रखा जाता है। यह संभव है कि बाक़ी हिस्सा परमाणु ऊर्जा विभाग, डीआरडीओ और एसएफसी के पास हो। इसलिए माना जा सकता है कि शांति के माहौल में भारत की पूरी परमाणु शक्ति बिना तैयारी के नहीं होती है।

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3. भारत की परमाणु नीति कहती है कि परमाणु हथियारों का पहला प्रयोग कभी भी भारत की तरफ से नहीं होगा। भारत परमाणु हथियारों का प्रयोग अपने उपर परमाणु हमला होने के बाद ही करेगा। लेकिन इसमें कई विरोधाभास हैं। अगर भारत या भारतीय सेना पर जैविक या रासायनिक हथियारों से कोई बड़ा हमला होता है तो भारत के पास यह विकल्प होगा कि वह परमाणु हथियारों से उसका जवाब दे।

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