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माफिया के खिलाफ जंग में इन अफसरों को मिली मौत

Wed, 18 Mar 2015 06:02 PM IST
Updated Wed, 18 Mar 2015 06:02 PM IST
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माफिया के खिलाफ जंग में इन अफसरों को मिली मौत

0fficers who paid a heavy price for their honesty

ईमानदार होना अच्छी बात है, लेकिन भारत में प्रशासनिक सेवा में रहते हुए ईमानदारी पेश करना थोड़ा मुश्किल होता है। हाल ही के कुछ सालों में कुछ ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी ईमानदारी और वफादारी का ईनाम मौत के रुप में मिला है। मिलिए ऐसे ही कुछ ईमानदार अधिकारियों से जिन्होंने मौत को गले लगा लिया लेकिन अपनी ईमानदारी को दाग नहीं लगने दिया।


माफिया के खिलाफ जंग में इन अफसरों को मिली मौत

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डीके रवि कुमार: आईएस अधिकारी डीके रवि कुमार की उनके बैंगलोर स्थित निजी आवास में रहस्यमय हालत में पंखे से लटकती हुई लाश बरामद हुई थी। पुलिस ने इस घटना को आत्महत्या करार दिया। बताया जाता है कि रवि ने कोलार में अपने कार्यकाल के दौरान रेत माफियाओं का खात्मा कर डाला था। बैंगलोर में उनका अगला निशाना बिल्डर माफिया थे।

माफिया के खिलाफ जंग में इन अफसरों को मिली मौत

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शणमुगम मंजूनाथ: आईआईएम लखनऊ के पूर्व छात्र (साल 2003 बैच) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सेल्स मैनेजर शणमुगम मंजूनाथ की 19 नवंबर 2005 को हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या उत्तर प्रदेश के एक पेट्रोल पंप मालिक मोनू मित्तल ने की थी। मंजूनाथ ने यूपी के लखीमपुर खीरी में स्थित मोनू के पेट्रोल पंप में मिलावट के रैकेड का भंडाफोड़ किया था।

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माफिया के खिलाफ जंग में इन अफसरों को मिली मौत

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नरेंद्र कुमार सिंह: 30 साल के एक आईपीएस अधिकारी पर मध्य प्रदेश के मोरैना में पूरी की पूरी ट्रैक्टर ट्राली चढ़ा दी गई थी। उन्होंने माइन स्टोन को अवैध रुप से ले जारी एक गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी।

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सत्येंद्र दुबे: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजक्ट मैनेजर सत्येंद्र दुबे ने बड़े पैमाने पर काफी सारी निर्माण परियोजनाओं में हो रही धांधली को उजागर किया था। उन्हें गया के सर्किट हाउस के सामने 27 नवंबर 2003 को गोली मार दी गई। वो वाराणसी से आ रही ट्रेन से उतरने के बाद अपने घर की तरफ जा रहे थे। 

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