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मोदी ने सीखा वक्त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

Sat, 05 Apr 2014 03:14 PM IST
Updated Sat, 05 Apr 2014 03:14 PM IST
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मोदी ने सीखा वक्‍त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

modi in varieties of turban styales

मोदी का साल 2011 में अहमदाबाद में सद्भावना उपवास के दौरान मुसलमानों की पारंपरिक टोपी नहीं पहनना विवाद का कारण बना था लेकिन चुनावी मौसम में वो विभिन्न वर्गों की पगड़ी और टोपी पहनकर स्थानीय लोक रीति से जुड़ने और मतदाताओं को रिझाने में पीछे नहीं हैं। बेंगलुरु के एक रैली में मोदी का ख़ास अंदाज़।


मोदी ने सीखा वक्‍त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

modi in varieties of turban styales

ये तस्वीर पूर्वोत्तर राज्य असम के सिल्चर में हुई भाजपा की 'बरक बिकाश समाबेश' रैली के दौरान की है। 22 फरवरी की इस रैली में मोदी ने स्थानीय पगड़ी 'अजापी' पहन रखी है।

मोदी ने सीखा वक्‍त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

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ये तस्वीर भी 22 फरवरी की है, जब मोदी अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग ज़िले के पासीघाट में थे। इस 'विजय संकल्प अभियान' रैली में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने स्थानीय 'आदि' क़बीले की पारंपरिक टोपी डुमलुक पहन रखी है।

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मोदी ने सीखा वक्‍त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

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असम की पारंपरिक टोपी जापी पहने हुए मोदी। गले में असम का पारंपरिक गमछा भी है। यह रैली भी आठ फ़रवरी को ही गुवाहाटी में हुई थी। रैली का नाम था 'महागर्जन रैली।'

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मोदी ने सीखा वक्‍त पर 'पगड़ी' बदलने का गुर!

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मणिपुर के पश्चिमी इंफाल में हुई एक जनसभा में मोदी। माना जाता है कि ऐसे स्थानीय प्रतीकों को अपनाने से मतदाता बाहर से आए नेता से जुड़ते हैं।

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