एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच
कहते हैं वेनेजुएला के ला साबानेटा जेल के अंदर लोगों के मरने की आशंका ज्यादा रहती है बजाए सड़कों पर मरने की। यहां जगह से ज्यादा कैदी रहते हैं, सुविधाओं के लिए पैसे नहीं मिलते और देखरेख के लिए लोग भी कम हैं। कैदियों के गैंग ही हुक्म चलाते हैं और रेप तो जैसे यहं आम बात होती हैं। 2013 में एक रेड पड़ी तो यहां से कई हथियार और कोकेन बरामद हुए थे।
एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच
रूस का व्लादिमिर सेंट्रल जेल तो बिमारियों का भंडार है। इस जेल में जरूरत से ज्यादा कैदी रहते हैं। यहां के गार्ड कैदियों को जबरन उनके कमरे से बाहर लाते हैं। दीवार पर हाथ रख तक उन्हें बुरी तरह पीटते हैं। हालत यह हो जाती है कि पीटने के बाद उन्हें जमीन पर घसीटते हुए वापस कमरे तक ले जाना पड़ता है। यही नहीं, कैदियों को एक दूसरे को भी मारने को कहा जाता है।
एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच
बैंग क्वांग जेल, थाईलैंड में अपनी सजा के शुरुआती तीन महीनों में कैदियों को बेड़ियों में रहना होता है। मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों को लोहे की हथकड़ियां पहनाई जाती हैं जो उनके पैरों को भी बांध कर रखती हैं। यहां कम से कम सजा 25 साल की है। खाने में सिर्फ एक बार एक कटोरी चावल और सब्जी मिलती है। इस कारण कैदी कुपोषण और बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। जेल में पानी की भी सुविधा बेकार है।
एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच
राइकर्स आईलैंड न्यू यॉर्क में 10 जेल हैं जहां लगभग 12 से 17 हजार कैदी रहते हैं। यहां जेल के अंदर भी कैदियों के साथ जेल के गार्ड और दूसरे कैदी रेप और मर्डर तक कर देते हैं। यहां कैदियों के मनोरंजन के लिए 'फाईट क्लब' होता है जिसमें कैदी आपस में लड़ते हैं और कई बार तो किसी न किसी की मौत भी हो जाती है।
एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच
पेटक आईलैंड जेल, रूस में हर कैदी को दिन मे 20 घंटे तक अकेले कालकोठरी में रखा जाता है जहां टायलेट तक की सुविधा नहीं होती। कैदियों को साल में सिर्फ 2 दिन ही अपनों से मिलने दिया जाता है। सुविधाओं की कमी और अकेलेपन के शिकार हो चुके कई कैदी सजा पूरी होने से पहले ही या तो पागल हो चुके होते हैं या मर जाते हैं।