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पुराने जमाने के हथियारों के आगे नहीं चलता था किसी का जोर
Thu, 05 Nov 2015 07:57 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 05 Nov 2015 07:57 PM IST
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पुराने जमाने के हथियारों के आगे नहीं चलता था किसी का जोर
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आज इंसान ने भले ही अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार बना लिए हैं, लेकिन इन पुराने हथियारों के आगे दुश्मन पानी मांगता था। देखें दिलचप्स तस्वीरें।
पुराने जमाने के हथियारों के आगे नहीं चलता था किसी का जोर
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बाघ के पंजे की तरह दिखने की वजह से इस प्राचीन हथियार का नाम बाघ नख पड़ा। हमलावर इसे हथेली में फिट करके दुश्मन पर झपट्टा मारता था। माना जाता है कि माराठा शासक शिवाजी ने बीजापुर के जनरल अफजल खान के साथ हुई लड़ाई में बाघ नख इस्तेमाल किया था। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि एक समय तक बंगाल में स्कूल जाने वाली छात्राएं भी खुद की सुरक्षा के लिए बाघ नख का इस्तेमाल करती रही हैं।
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जुआ एक चीनी हथियार है। इसमें लोहे की रॉड के सिरे पर नाखूनों वाला पंजा बना होता था। इसको युद्ध के दौरान ढाल छीनने और झपट्टा मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
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मैन कैचर का इस्तेमाल यूरोप में 18वीं सदी के अंत तक किया जाता रहा है। इसको ऐसे खास ढंग से डिजायन किया गया था कि इसमें दुश्मन की गरदन से लेकर उसके हाथ या पैर को आसानी से फंसाया जा सकता था। इसे घुड़सवार को फंसाकर जमीन पर गिराने के काम में लाया जाता था।
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कटार का इस्तेमाल सबसे पहले तमिलनाडु में किया गया। पहली नजर में ये सिंगल ब्लेड वाला हथियार नजर आता है। लेकिन इस्तेमाल के समय इसे दबाते ही इसके दो और ब्ले़ड खुल जाते हैं। दक्षिण एशिया में इस हथियार का चलन खूब रहा है।
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