उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सिविल जज) (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2018 में राजधानी के मेधावियों ने अपना परचम लहराया। लखनऊ के मूल निवासी और यहां रहकर पढ़ाई करने वाले 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल की। इनमें से सबसे ज्यादा विद्यार्थी लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के हैं। अमर उजाला ने इन मेधावियों से बात कर जानी उनकी सफलता की कहानी। पेश है रिपोर्ट :
पीसीएस-जे में इन्होंने लिखी कामयाबी की इबारत, बेहद प्रेरक हैं इनकी सक्सेज स्टोरी, यहां देखें
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एलएलबी के साथ ही की परीक्षा की तैयारी
गंधर्व पटेल- 5वीं रैंक
पीसीएस-जे में अलग से पढ़ने की जरूरत नहीं है। परीक्षा के लिए मैंने एलएलबी ऑनर्स के साथ ही तैयारी जारी रखी। एलएलबी के बाद इसीलिए मुझे पहले प्रयास में सफलता हासिल हुई। परीक्षा की तैयारी के लिए मैंने नियमित पढ़ाई की और नोट्स भी बनाए। रिवीजन का बड़ा योगदान होता है। पिता रामप्रताप वर्मा और मां गायत्री देवी शिक्षक हैं।
समय से न्याय दिलाने का करूंगी प्रयास
ऋचा शुक्ला-24वीं रैंक
मेरी कोशिश होगी कि लोगों को समय से न्याय दिलाऊं। काफी संख्या में केस पेंडिंग पड़े हैं। कोशिश करूंगी कि जो केस फर्स्ट ट्रायल में पूरे हो सकते हैं, उन्हें न्याय मिल जाए। मैंने लखनऊ विवि से 2016 में एलएलबी किया। यह दूसरा अटेंप्ट है। खुद से तैयारी की। पूर्व के वर्षों के पेपर लेकर उनका रिवीजन किया। पैटर्न क्या है, इस पर फोकस किया। नोट्स तैयार कर रिवीजन किया। पिता रामकुमार शुक्ला डूडा में हेड क्लर्क व मां कुसुमा शुक्ला गृहणी हैं।
समय प्रबंधन से पाई कामयाबी
शिप्रा दूबे- 42वीं रैंक
समय प्रबंधन मेरी सफलता का राज है। जिन विषयों पर मेरी पकड़ कम थी उन पर ज्यादा फोकस किया और अभ्यास किया। मैंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। सफलता का श्रेय पिता लल्लन दुबे, मां मधुलिका दुबे समेत अपने शिक्षकों को देती हूं। अन्य अभ्यर्थियों के लिए टिप्स है कि वे किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ज्यादा सोचें नहीं, बस लगन के साथ जुट जाएं।
कोचिंग नहीं खुद पर रखें भरोसा
देवप्रीत सारस्वत- 38वीं रैंक
कोचिंग से ज्यादा खुद पर भरोसा रखना जरूरी है। प्री की तैयारी के साथ मेन्स की तैयारी करना सही रहता है। मैंने लविवि से एलएलबी ऑनर्स किया। शिक्षकों व साथियों ने भी काफी मदद की। मैं झांसी में अपने घर में रहने के दौरान लगातार उनसे संपर्क में रहा। सफलता में मेरे परिवार के साथ ही शिक्षक और साथियों का योगदान अहम है।
पहले मेंस की तैयारी की
मनीषा गुप्ता- 166वीं रैंक
मूल रूप से गोरखपुर निवासी हूं। मैंने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विवि से बीए एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी थी। पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। पहले मैंने पूरे फोकस के साथ मेंस की तैयारी की। इससे प्री की तैयारी स्वत: हो गई। मैंने सहज होकर साक्षात्कार दिया। पिता विनोद गुप्ता और मां सुमन गुप्ता को सफलता का श्रेय देती हूं। विवि के शिक्षकों का भी योगदान है। दूसरे अभ्यर्थियों के लिए भी यही टिप्स हैं कि वे मेंस की तैयारी जमकर करें।
सेल्फ स्टडी पर था भरोसा
अक्षिता मिश्रा-46वीं रैंक
मैंने अपनी सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और पहले प्रयास में सफलता हासिल की। सभी विषयों पर बराबर फोकस किया। स्टडी मैटीरियल, किताबें, न्यूजपेपर से तैयारी संग अभ्यास किया। पिता डॉ. एनके मिश्रा और मां तुलिका मिश्रा को सफलता का श्रेय देती हूं। शिक्षकों का योगदान रहा। अन्य अभ्यर्थियों के लिए टिप्स हैं कि सभी विषयों पर अपनी मजबूती बनाएं।