इस आसन को बद्धकोणासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आसन को करते वक्त एक कोण बनता है। इस आसन के दौरान पैरों को तेज गति में हिलाया जाता है और वह तितली के पंखों जैसे प्रतीत होते हैं। इसलिए इस आसन को तितली आसन भी कहा जाता है। आइए जानते हैं बद्धकोणासन कैसे किया जाता है और इस आसन को करने से क्या लाभ मिलते हैं।
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मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अपनाएं ये आसन
Fri, 18 Oct 2019 07:53 AM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Fri, 18 Oct 2019 07:53 AM IST
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बद्धकोणासन/तितली आसन कैसे करें
बद्धकोणासन करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों को फैलाकर सीधे बैठ जाएं। अब अपने दोनों पैरों को अंदर की ओर मोड़ लें। ध्यान रहे कि आपके दोनों तलवे एक-दूसरे को छूने चाहिए। अब अपने दोनों हाथों से अपने दोनों पैरों को पकड़ लें। कोशिश करें कि आपकी एड़िया आपके जननांगों के करीब हो। अब इस अवस्था में लंबी गहरी सांस लें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपने घुटनों और जांघो को जमीन की तरफ दबाएं। अब तितली की तरह अपने पैरों को ऊपर-नीचे हिलाने की कोशिश करें। धीरे-धीरे करके अपनी गति बढ़ाते जाएं। इस पूरी प्रक्रिया में सांस लेते रहें।
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बद्धकोणासन/तितली आसन करने के लाभ
इस आसन को करने से प्रसव आसानी से हो जाता है।
बद्धकोणासन मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा को कम करता है।
यह आसन वं रजोनिवृति के लक्षणों से भी आराम दिलाने में सहायक है।
इस आसन का प्रभाव जांघो और घुटनों पर पड़ता है जिसके कारण श्रोणि एवं कूल्हों में लचीलापन आने लगता है।
ज्यादा देर चलने की वजह से होने वाली थकान दूर करता है।
इस आसन को करने से प्रसव आसानी से हो जाता है।
बद्धकोणासन मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा को कम करता है।
यह आसन वं रजोनिवृति के लक्षणों से भी आराम दिलाने में सहायक है।
इस आसन का प्रभाव जांघो और घुटनों पर पड़ता है जिसके कारण श्रोणि एवं कूल्हों में लचीलापन आने लगता है।
ज्यादा देर चलने की वजह से होने वाली थकान दूर करता है।