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इस तरह करें जुड़वां बच्चों की पहचान

Mon, 06 Mar 2017 08:25 AM IST
amarujala.com- Presented By: पवनप्रीत कौर
amarujala.com- Presented By: पवनप्रीत कौर Updated Mon, 06 Mar 2017 08:25 AM IST
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how to recognize twins

हर इंसान के दो हाथ, दो पैर, दो आंखें, दो कान और एक नाक होती है। हां, बस रंग का फर्क जरूर होता है। ये फर्क भी हर जगह के वातावरण के मुताबिक होता है। जैसे अफ्रीका में आपको एक ही


रंग-रूप वाले लोग मिलेंगे। अमरीका और यूरोप में लगभग एक जैसी रंगत वाले लोग हैं। अगर बात करें भारत जैसे देश की तो यहां एक ही देश में बहुत से रंग रूप और कद काठी के लोग मिल सकते हैं। क्या आपके जहन में कभी ये सवाल नहीं आता कि हम उन्हें पहचान कैसे लेते हैं?

हालांकि ये अंतर तभी पकड़ में आता है जब वो दोनों साथ हों, वरना पहचान करने में दिक्कत हो ही जाती है। इसी मुश्किल के हल के लिए अमरीका की इंडियाना यूनिवर्सिटी ने 'बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन' तकनीक की खोज की है। अपनी खोज के सिलसिले में कुछ रिसर्चर अमरीका के ओहायो में आयोजित होने वाले सालाना 'ट्विन डे' फेस्टिवल में पहुंचे। उन्होंने देखा कि हर साल धीरे-धीरे जुड़वा बच्चों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। हालांकि हाथों की उंगलियों के निशान से पहचान करना एक आसान और पारंपरिक तरीका रहा है।

चलिए इन तरीकों से अलग आपको शरीर के कुछ हिस्सों के बारे में बताते हैं, जिनके जरिए बिना किसी टेस्ट के आप एक समान नजर आने वाले लोगों के बीच फर्क कर सकते हैं।

कानों से पहचान

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- सबसे पहल बात कान की। कहने को तो सभी के दो कान होते हैं लेकिन सबके कान एक समान नहीं होते। भले ही ये देखने में एक जैसे लगते हैं लेकिन इनकी बनावट एक दूसरे इंसान से बिल्कुल जुदा होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 1950 से फोरेंसिक वैज्ञानिक संदिग्धों के कान की बनावट की बुनियाद पर मुजरिम तक पहुंचने का काम करते आ रहे हैं। 1998 में ऐसे सॉफ्टवेयर बना लिए गए जो हरेक कान के फर्क को पढ़ सकते थे।

इसके बाद 'थ्री-डी' स्केनिंग की शुरुआत हुई, जिससे कान की ज्योमेट्रिक बनावट को पढ़ा जा सकता है। ये तकनीक इतने अडवांस है कि इसके जरिए 0.02 मिली सेकेंड में 99.9 फीसद सटीक अंदाज के
साथ कान की बनावट में फर्क की पहचान की जा सकती है।

खोजकर्ताओं का कहना है कि उम्र के साथ साथ हम जैसे-जैसे बढ़ते जाते हैं, हमारे चेहरे और शरीर की बनावट में अंतर आने लगता है। कान हमारे शरीर का ऐसा अंग है जिनमें बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं
आता। हमारे कान के अंदरूनी हिस्से में बहुत छोटे-छोटे बाल होते हैं। ये अंदरूनी हिस्सा एक खास तरह की तरंग के साथ एक आवाज़ पैदा करता है। हर इंसान के कान में ये आवाज अलग तरह की होती है। इस आवाज की पहचान करने के लिए पिछले साल ही एक विशेष प्रकार का माइक्रोफोन बना लिया गया है।

जिस्म की खुशबू

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- जिस्म की खुशबू का जिक्र तो आपने शायरी में खूब पढ़ा होगा। अब आप कहेंगे वो तो तरह-तरह के इत्र और परफ्यूम आदि लगाने के बाद आती है। आप गलत हैं, ऐसा नहीं है। हर इंसान के जिस्म की एक खुशबू होती है और ये एक दूसरे से अलग होती है। परिवार में जितने लोग होंगे सभी की अलग खुशबू होगी। ये और बात है कि किसी के जिस्म की महक बहुत अच्छी होती है तो किसी की नागवार होती है।

अमरीका के आर्मी रिसर्च ऑफिस का कहना है हर इंसान अपने चारों ओर हवा का एक गिलाफ ओढ़े रहता है और इसी में उसकी खुशबू लिपटी रहती है। वो जहां से भी गुजरता है ये खुशबू उसके साथ
जाती है। खोजी कुत्ते इसी खुशबू की बुनियाद पर मुजरिम तक पहुंचते हैं। बायोमेट्रिक्स इंजीनियर सुनील झा का कहना है कि शरीर की गंध का इस्तेमाल बायोमेट्रिक पासपोर्ट बनाने में भी किया जा
सकता है।

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चलने का अंदाज

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- हमारे चलने का अंदाज भी हमारी पहचान होता है। कहने को तो हम सभी एक पैर के आगे दूसरा पैर रखते हैं और कदम बढ़ा लेते हैं लेकिन क़दम बढ़ाने का ये अंदाज़ भी हर इंसान का अलग होता है। हो सकता है नंगी आंख से देखने पर हमें सभी की चाल एक जैसी लगे लेकिन कंप्यूटर आपकी चाल के फर्क को बहुत बारीकी से पकड़ लेता है और 'थ्री डी काइनेटिक मॉडल' के जरिए तो ये काम और भी आसान हो गया है। मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां अब ऐसी तकनीक बनाने जा रही हैं, जिससे फोन जेब में रखने वाले की लोकेशन आसानी से पताई लगाई जा सकेगी।

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पीठ की बनावट

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- आपकी पीठ की बनावट से भी आपकी पहचान की जी सकती है। जापान के रिसर्चर ने ऐसे प्रेशर सेंसिटिव पैड बनाए हैं जो कार की सीट पर फिट किए जा सकते हैं। इसमें 360 सेंसर्स लगे हैं, जो आपके बैठने के तरीके से बता सकते हैं कि किसी दूसरे इंसान से कितने अलग हैं।

रिसर्चरों के मुताबिक इन डिवाइस का इस्तेमाल कंप्यूटर को अनलॉक करने में किया जा सकता है। पासवर्ड याद रखने का झंझट ही खत्म हो जाएगा। बहुत बार आपने अपनी उंगली कान में लगाकर कान बंद किया होगा। आपको बाहर का शोर कम सुनाई दिया होगा। एक अजीब सी आवाज कान में गूंजती हुई सुनाई दी होगी। कान से उंगली हटाने पर वो आवाज खत्म हो जाती है।

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