जब किसी कपल की शादी होती है, तो वे बेहद खुश होते हैं और अपनी आने वाली जिंदगी के लिए कई प्लान करते हैं। कहते हैं शादी की खुशी किसी भी लड़के और लड़की के लिए काफी बड़ी खुशी होती है, लेकिन जब उनके जीवन में बच्चा आता है तो ये खुशी दोगुनी हो जाती है। बच्चे को माता-पिता बड़े ही लाड प्यार से पालते हैं। हालांकि, कई बार गलती होने पर ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को डांटने के साथ ही उन पर हाथ तक उठा देते हैं। लेकिन क्या बच्चों की पिटाई करना सही है? क्या इससे बच्चे सुधरते हैं या फिर और बिगड़ते हैं? ऐसे ही कई सवाल हैं, जो बच्चों की पिटाई से जुड़े होते हैं। लेकिन हाल ही में एक अध्ययन सामने आया जिसके मुताबिक बच्चों के व्यवहार में सुधार लाने के लिए पीटना या उन पर हाथ उठाने से बच्चों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
अध्ययन: अगर आप भी करते हैं बच्चों की पिटाई तो संभल जाएं, इससे उनके व्यवहार पर पड़ता है नकारात्मक असर
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दरअसल, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन यानी यूसीएल और विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने बच्चों को थप्पड़ मारना और उनको पीटने को लेकर अध्ययन किया। ‘द लासेंट’ जर्नल में प्रकाशित हुए इस अध्ययन में दुनिया भर के उन 69 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें बच्चों पर एक अरसे तक नजर रखी गई और शारीरिक दंड यानी बच्चों को पीटने और उससे सामने आए परिणामों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इस अध्ययन में कहा गया कि दुनिया भर के दो से चार साल की उम्र के 63 फीसदी यानी लगभग 25 करोड़ बच्चे अपने माता-पिता या उनकी देखरेख करने वालों के द्वारा शारीरिक दंड का सामना करते हैं। इन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों की पिटाई करते हैं। इस समीक्षा अध्ययन की मुख्य लेखिका और यूसीएल की महामारी विज्ञान एवं लोक स्वास्थ्य की डॉक्टर अंजा हेलेन ने बताया कि, "शारीरिक दंड देना अप्रभावी और नुकसानदेह है, जिससे बच्चों और उनके परिवार को कोई लाभ नहीं मिलता है। हम शारीरिक दंड और व्यवहार संबंधी दिक्कतों जैसे कि आक्रामकता के बीच एक संबंध देखते हैं। शारीरिक दंड देने से बच्चों में लगातार इस तरह की व्यवहार संबंधी परेशानियां बढ़ने का अनुमान रहता है।"
बच्चों की पिटाई के पीछे अभिभावकों की सोच
- यही नहीं, डॉक्टर हेलेन ने ये भी कहा कि इससे भी ज्यादा चिंता की बात तो ये है कि जिन बच्चों की पिटाई (शारीरिक दंड) की जाती है, उनमें हिंसा के ज्यादा गंभीर स्तर का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चे के माता-पिता उनकी पिटाई इसलिए करते हैं कि बच्चे में कोई सकारात्मक बदलाव हो। लेकिन बच्चों में इसका उल्टा असर होता है। माता-पिता द्वारा बच्चों को शारीरिक दंड देने पर बच्चों के व्यवहार में बदलाव आता है, उसकी सोच नकारात्मक हो जाती है और कई बच्चों में तो अपने अभिभावकों के प्रति गुस्सा भी भरा होता है।
बच्चों को पीटने पर इन देशों में रोक
- भारत जैसे देश में अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता कभी पढ़ाई को लेकर तो कभी बच्चों की किसी गलती की वजह से उन्हें शारीरिक दंड दे देते हैं। लेकिन कई देश ऐसे भी हैं, जहां इस पर रोक है। स्कॉटलैंड और वेल्स समेत 62 देशों में बच्चों को उनके अभिभावकों या किसी अन्य द्वारा शारीरिक दंड देने पर रोक लग चुकी है। वहीं, विशेषज्ञों की मांग है कि ये नियम सभी जगह लागू हो।