बच्चे जैसे- जैसे बड़े होने लगते हैं, उनकी शरारतें भी बढ़ती हैं। उन्हें कई बार माता-पिता बोलते हैं लेकिन वे कहना ही नहीं मानते हैं। ऐसे में माता-पिता को लगता है कि बच्चों पर गुस्सा करने और चिल्लाने के अलावा तो कोई विकल्प ही शेष नहीं है लेकिन बहुत छोटे बच्चों को यदि आप डांट दोगे तो कोई समस्या नहीं होगी पर बढ़ते बच्चों को डांटना ठीक नहीं है क्योंकि आपका गुस्सा उनकी मनोस्थिति को प्रभावित करता है। अगली स्लाइड्स से जानिए किस तरह से आपके गुस्से का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है।
बच्चों पर न करें अधिक गुस्सा, इस तरह से पड़ता है उनकी मनोस्थिति पर प्रभाव
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आत्मविश्वास की कमी
यदि आप बच्चों पर चिल्लाते ही रहते हैं तो धीरे-धीरे वे अपना आत्मविश्वास खोने लगते हैं। वे डर-डरकर जवाब देते हैं। स्कूल में भी शिक्षक जब उनसे सवाल पूछते हैं तो वे जवाब नहीं दे पाते हैं जबकि जवाब उन्हें पता होता है। लेकिन डांट का डर उनके आत्मविश्वास को दिन-ब-दिन कमजोर ही करता है।
नकारात्मक विचारों का जन्म
यदि आप बच्चों को बार-बार डांटते रहते हैं तो वे आपके बारे में मन ही मन में नकारात्मक बातें सोचने लगते हैं। उनके मन में इस प्रकार के भाव आते हैं कि मानो आप उनसे प्रेम ही न करते हों। वे आप पर विश्वास नहीं कर पाते हैं, उनके मन में आपको लेकर संशय पैदा होने लगते हैं। कई बार तो वे आपकी परवरिश पर ही संदेह करने लगते हैं।
स्वभाव होता है आक्रामक
यदि आप बार-बार चिल्लाएंगे तो बच्चा भी वही सिखेगा। वह अपने दोस्तों व अन्य लोगों से चिल्लाकर बात करने लगेगा। हो सकता है कि थोड़े समय में वे आपसे भी चिल्लाकर बात करने लग जाएं जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। विद्यालय में यदि वो इस प्रकार का व्यवहार करेगा तो आप ही की छवि खराब होगी इसलिए खुद भी मीठा बोलें और बच्चों को भी ऐसी ही शिक्षा दें।
बच्चों के लिए झूठ बोलना सीखना बहुत आसान है। यदि आप बच्चों पर चिल्लाना शुरू करते हैं तो वे आपसे झूठ बोलना सीख जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि झूठ बोलने से वे आपके गुस्से से बच जाएंगे और वे बढ़ती उम्र के साथ बहुत बड़े- बड़े झूठ बोलने लगते हैं। इसलिए कोशिश करें कि उनपर कम से कम गुस्सा करें ताकि आप उनके मन के भावों को जान सकें और समझ सकें।