बेमिशाल शायर, लेखक, निर्देशक, निर्माता और गीतकार जब एक शख्स में समा जाए तो उसे गुलजार कहते हैं। शब्दों के मास्टर गुलजार आज 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उनका दीवाना है। आज हम आपको गुलजार साहब की लिखी हुई कुछ चुनिंदा पंक्तियां बताने जा रहे हैं जिनकी गहराइयों में प्यार और जिंदगी का असल मतलब छिपा है...
-उड़ के जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलती रही वह शाख़ फ़िज़ा में
अलविदा कहने को? या पास बुलाने के लिए?
-आइना देख कर तसल्ली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई
-सुनो.... जरा रास्ता तो बताना, मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी
-हम ने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू, हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम ना दो, सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो, प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
-एक बार वक्त से, लम्हा गिरा कही, वहा दास्ताँ मिली, लम्हा कही नहीं, थोड़ा सा हँसा के, थोड़ा सा रुला के, पल ये भी जानेवाला है