भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनकी दत्तक बेटी नमिता भट्टाचार्य ने दी।नमिता के साथ मौके पर उनके पति भी मौजूद थे। लोगों के दिल पर राज करने वाले अटल जी की लाइफ भले ही देखने में एक खुली किताब लगती हो पर उनकी लाइफ से जुड़े कई ऐसे राज हैं जिनके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। नमिता भट्टाचार्य असल में अटल बिहारी वाजपेयी जी की ही दत्तक बेटी थी। उनके ऐसे ही कुछ राज में एक राज उनकी बेटी से जुड़ा हुआ है। जी हां अब तक लोग सिर्फ यही जानते थे कि अटल जी ने शादी नहीं की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं उनकी एक बेटी भी थी। आइए जानते हैं उनकी बेटी और मां से जुड़े कई ऐसे अनसुने राज।
अटल जी का पैतृक गांव यूपी के बटेश्वर में था। ग्वालियर में ही 25 दिसंबर 1924 को उनका जन्म हुआ था। वहीं विक्टोरिया कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की। अटल जी का जीवन राजनीति, कविता और सादगी के बीच बीता। अटल जी के जीवन से जुड़ा एक सवाल ऐसा है, जिसका सही-सही जवाब और ठोस कारण किसी को नहीं पता! सवाल यह कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी शादी क्यों नहीं की? विपक्ष के हमलों के बीच जब सदन में उनके अविवाहित होने का बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी साफगोई के साथ कहा था, ‘मैं अविवाहित जरूर हूं, लेकिन कुंवारा नहीं।’
अटल बिहारी से जब-जब उनके शादी न करने का कारण पूछा जाता तो वह बड़ी शांति और संयमित अंदाज में जवाब देते, ‘व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाया।’ हां, यह भी जरूर था कि हर बार यह कहकर वह धीरे से मुस्कुरा देते थे। उनके करीबियों का मानना था कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था।
कॉलेज के दिनों में अटल जी की एक महिला मित्र राजकुमारी कौल हुआ करती थीं, जो अपने आखिरी समय तक अटल जी के साथ रही थीं। दोनों ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (लक्ष्मीबाई कॉलेज) में सहपाठी थे। अटल जी पर लिखी गई किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयीः ए मैन ऑफ आल सीजंस’ में इस घटना का जिक्र है।
कुछ समय बाद अटल जी राजनीति में सक्रिय हो गए और इस बीच मिसेज कौल के पिता ने उनकी शादी कॉलेज में प्रोफेसर ब्रिज नारायण कौल से कर दी। शादी के बाद मिसेज कौल का परिवार दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज कैम्पस में रहने लगा। अटल जी और राजकुमारी कौल का संबंध कभी चर्चा का कारण नहीं बना। हालांकि जब 2014 में राजकुमारी कौल की मौत हुई तो देश के कई बड़े अखबारों ने इसे प्रमुखता से छापा।