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Makar Sankranti 2019: Know about the History, importance and significance of Makar Sankranti
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मकर संक्रांति से जुड़ी हैं ये 5 मान्यताएं, जानिए क्यों मनाया जाता है ये त्योहार
लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
Published by: मंजू ममगाईं
Updated Tue, 15 Jan 2019 12:10 PM IST
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Makar Sankranti
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आज देशभर में लोग मकर संक्रांति का त्योहार मना रहे हैं।भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के त्योहार को विभिन्न नामों से पहचाना जाता है।लेकिन क्या आप जानते हैं इस दिन को मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई।बता दें, मकर संक्रांति के त्योहार को मनाने के पीछे कई मान्यताएं दी जाती हैं।एक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था।यही वजह है कि इस दिन 'गंगा' नदी में स्नान करने का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है।आइए जानते हैं मकर संक्रांति से जुड़ी ऐसी ही कुछ मान्यताओं और महत्व के बारे में।
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सूर्य देव
शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं।मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने खुद उनके घर जाते हैं।यही वजह है कि इस खास दिन को मकर संक्रांति के नाम से पहचाना जाता है।
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दूसरी मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जा मिली थीं।कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस खास दिन तर्पण किया था।उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी।यही वजह है कि मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
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भीष्म पितामह
- फोटो : Social Media
महाभारत के भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए, सूर्य के मकर राशि मे आने का इंतजार किया था।सूर्य के उत्तरायण के समय देह त्याग करने या मृत्यु को प्राप्त होने वाली आत्माएं कुछ काल के लिए 'देवलोक' में जाती हैं। जिससे आत्मा को 'पुनर्जन्म' के चक्र से छुटकारा मिल जाता है और इसे 'मोक्ष' प्राप्ति भी कहा जाता है।
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भगवान विष्णु
कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा करते हुए सभी असुरों के सिर को मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था। इस प्रकार यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता के अंत का दिन भी माना जाता है।
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