जोड़ों में दर्द और कमजोरी की बात आते ही सबसे पहले आर्थराइटिस का ख्याल आता है। अर्थराइटिस या गठिया हड्डियों और जोड़ों में होने वाली सूजन या इसके डैमेज होने की स्थिति है। इसमें जोड़ों को आपस में रगड़ खाने से बचाने वाली सुरक्षात्मक परत यानी कार्टिलेज घिस जाती है, जिसके कारण चलते समय दर्द होता है।
वर्ल्ड आर्थराइटिस डे: बिना लक्षणों के बढ़ती है ऑस्टियोपेनिया की समस्या, हड्डियों को कर देती है खोखला
World Arthritis Day 2026: ऑस्टियोपेनिया हड्डियों का घनत्व कम होने की समस्या है, जिसमें आमतौर पर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। बढ़ती उम्र, मेनोपॉज, कैल्शियम-विटामिन डी की कमी और शारीरिक निष्क्रियता इसका जोखिम बढ़ा सकते हैं। बोन डेंसिटी टेस्ट से इसकी पहचान होती है।
आज वर्ल्ड आर्थराइटिस डे है। गठिया और अन्य रूमेटिक और मस्कुलोस्केलेटल बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 12 अक्तूबर को ये खास दिन मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हड्डियों की सेहत को ठीक रखने के लिए ऑस्टियोपेनिया के बारे में जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है।
- ऑस्टियोपेनिया असल में हड्डियों से जुड़ी ऐसी स्थिति है, जिसमें उनकी मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है। खास बात यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते।
- आप रोजमर्रा के काम करते रहते हैं, लेकिन हड्डियां अंदर ही अंदर पहले के मुकाबले कमजोर हो चुकी होती हैं।
- अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है। खानपान, शारीरिक गतिविधियों में कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस को एक ही न समझें
हड्डियों में मौजूद खनिज पदार्थों, खासकर कैल्शियम की मात्रा और हड्डियों का घनत्व कम होने को ऑस्टियोपेनिया कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो हड्डियों की मजबूती पहले के मुकाबले कम होने को ऑस्टियोपेनिया कहा जाता है।
- ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस दो अलग-अलग स्थितियां हैं, इसमें मुख्य अंतर हड्डियों के कमजोर होने की गंभीरता का है।
- ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, ऑस्टियोपेनिया होने का मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस होगा ही।
ऑस्टियोपेनिया के कारण क्या हैं?
कई कारणों से ऑस्टियोपेनिया की समस्या हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। इसी तरह महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से भी हड्डियों की कमजोरी बढ़ जाती है।
- इसके अलावा, डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधि न करना और धूम्रपान जैसी आदतें भी इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
- अगर आपके परिवार में पहले से किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की दिक्कत रही है या आप लंबे समय तक स्टेरॉयड जैसी दवाओं का इस्तेमाल करते रहे हैं तो इसके कारण भी हड्डियों की कमजोरी का खतरा हो सकता है।
फिर ऑस्टियोपेनिया से बचाव के लिए क्या करें?
ऑस्टियोपेनिया में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। हड्डियां कमजोर हो रही हों, तब भी जरूरी नहीं कि आपको कोई दर्द महसूस हो। डॉक्टर इसके लिए कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं जिससे स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके। वयस्कों में टी-स्कोर टेस्ट की मदद से इसके खतरों का पता लगाया जा सकता है।
- −1 या उससे अधिक: सामान्य हड्डी घनत्व।
- −1 से कम और −2.5 से अधिक: ऑस्टियोपेनिया।
- −2.5 या उससे कम: ऑस्टियोपोरोसिस
हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव मददगार हो सकती हैं।
- दूध-दही, पनीर, तिल और कुछ हरी पत्तेदार सब्जियों को आहार में शामिल करके कैल्शियम की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
- कैल्शियम के साथ विटामिन-डी भी जरूरी है। यह शरीर को कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।
- नियमित व्यायाम जैसे तेज चलना, सीढ़ियां चढ़ना और अपनी क्षमता के अनुसार हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हड्डियों और मांसपेशियों के लिए मददगार हो सकती है।
- धूम्रपान से बचें। ये आदत हड्डियों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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