इसमें कोई दो राय नहीं है कि आलू के बिना भारतीय भोजन अधूरा सा लगता है।आलू हमारे कई पारंपरिक व्यंजनों का अभिन्न अंग है, यही कारण है कि इसे सब्जियों का राजा भी कहा जाता है। आलू को नापसंद करने वाले लोग बहुत ही कम मिलेंगे। मेडिकल साइंस के अनुसार वैसे तो आलू से कोई नुकसान नहीं होता है, हालांकि इसका अधिक सेवन रक्त शर्करा और इंसुलिन के स्तर को बढ़ा सकता है। आलू में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, जो विभिन्न तरीकों से स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस को रोकना से लेकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में आलू के सेवन को फायदेमंद पाया गया है।
आज का हेल्थ टिप्स: इन बीमारियों में आलू खाने से करना चाहिए परहेज, इसका अधिक सेवन बढ़ा सकती है जटिलताएं
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वजन कम करने वाले लोग कम सेवन सुनिश्चित करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप अधिक वजन की समस्या से परेशान हैं और वजन को कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो इसमें आलू का सेवन कम करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 100 ग्राम आलू में लगभग 100 कैलोरी होती है, ऐसे में यह तेजी से वजन को बढ़ाने वाला हो सकता है। अतिरिक्त कैलोरी के कारण शरीर में फैट की मात्रा बढ़ सकती है जिसके चलते वजन को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।
मधुमेह रोगी करें परहेज
आलू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जिसका अधिक सेवन मधुमेह या मोटापे से ग्रस्त लोगों की जटिलताओं को बढ़ा सकती है। जिन लोगों का ब्लड शुगर अनियंत्रित बना रहता है उन्हें आलू से बिल्कुल परहेज करना चाहिए क्योंकि यह तेजी से शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा देता है। आलू का अधिक मात्रा में सेवन करना डायबिटीज के अनियंत्रण का कारण बन सकता है, ऐसे में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
हृदय रोगी भी ध्यान दें
यदि आप हृदय रोग के शिकार हैं तो सामान्यतौर पर डॉक्टर आपको बीटा-ब्लॉकर्स कंपाउंड वाली दवाएं देते हैं। इससे रक्त में पोटेशियम का स्तर बढ़ सकता है। बीटा-ब्लॉकर्स लेते समय आलू जैसे हाई पोटेशियम वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। यह आपकी जटिलताओं को बढ़ा सकते हैं। हृदय रोग में आहार का विशेष ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।
बढ़ सकती है किडनी की समस्या
आलू में पोटैशियम की अधिकता होती है, शरीर में पोटेशियम का उच्च स्तर किडनी की बीमारियों के शिकार या किडनी फेलियर की समस्या वाले लोगों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। किडनी के ठीक से काम न कर पाने की स्थिति में अतिरिक्त पोटेशियम को फ़िल्टर कर पाना कठिन हो जाता है। ऐसे में शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ जाना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।