कई देशों में दहशत फैलाने वाला जीका वायरस अब भारत भी पहुंच चुका है। हाल ही में जयपुर में 22 लोगों में जीका वायरस के संक्रमण पाए गए हैं। ज्यादातर जीका वायरस की शिकार गर्भवती महिलाएं बनाती है। इससे पीड़ित महिलाओं के बच्चे अविकसित दिमाग के साथ पैदा होते हैं। सबसे पहले लैटिन अमेरिकी देशों में इस बीमारी का पता चला था। आइए जानते हैं इस बीमारी के इतिहास, लक्षण और बचाव के तरीके।
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डेंगू से भी खतरनाक है जीका वायरस, जानें क्या है इसके बचाव और लक्षण
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:02 AM IST
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जीका का इतिहास
जीका मच्छर का वायरस एडीज मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है यह मच्छर दिन के दौरान सक्रिय रहता है। इसके प्रभाव का अध्ययन 1947 के समय में जीका को सबसे पहले जानवरों के समुदाय (बंदरों) में पता चला, जब पूर्व अफ्रीका में युगांडा के जंगल में यह संक्रमण फैला था।
1952 में मनुष्यों में पहला जीका संक्रमण पाया गया। 2007 तक, जीका संक्रमण केवल अफ्रीका और एशिया के हिस्सों में पाया जाता था। 2007 में, ओशिनिया (याप के द्वीप, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्यों) से एक बड़े प्रकोप की सूचना मिली थी। 2016 में, जब ब्राजील (दक्षिण अमेरिका) में कई मामलों का पता चला, डब्ल्यूएचओ ने वायरस के प्रसार को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये आपातकाल घोषित कर दिया।अब 2018 में राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस के 22 मामले सामने आए हैं।
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जीका मच्छर का वायरस एडीज मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है यह मच्छर दिन के दौरान सक्रिय रहता है। इसके प्रभाव का अध्ययन 1947 के समय में जीका को सबसे पहले जानवरों के समुदाय (बंदरों) में पता चला, जब पूर्व अफ्रीका में युगांडा के जंगल में यह संक्रमण फैला था।
1952 में मनुष्यों में पहला जीका संक्रमण पाया गया। 2007 तक, जीका संक्रमण केवल अफ्रीका और एशिया के हिस्सों में पाया जाता था। 2007 में, ओशिनिया (याप के द्वीप, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्यों) से एक बड़े प्रकोप की सूचना मिली थी। 2016 में, जब ब्राजील (दक्षिण अमेरिका) में कई मामलों का पता चला, डब्ल्यूएचओ ने वायरस के प्रसार को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये आपातकाल घोषित कर दिया।अब 2018 में राजस्थान के जयपुर में जीका वायरस के 22 मामले सामने आए हैं।
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जीका के लक्षण
जीका वायरस असल में बहुत कम होने वाली नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है।जिसे वैज्ञानिक गुलियन-बार सिंड्रोम नाम से भी पुकारते हैं। इसकी वजह से अस्थाई तौर पर लकवा भी मार जाता है। इसके शिकार लोगों को हल्का बुखार, कंजक्टिवाइटिस (लाल दुखती आंखें), सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, शरीर में चकत्ते की शिकायत हो जाती है।
जीका वायरस असल में बहुत कम होने वाली नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है।जिसे वैज्ञानिक गुलियन-बार सिंड्रोम नाम से भी पुकारते हैं। इसकी वजह से अस्थाई तौर पर लकवा भी मार जाता है। इसके शिकार लोगों को हल्का बुखार, कंजक्टिवाइटिस (लाल दुखती आंखें), सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, शरीर में चकत्ते की शिकायत हो जाती है।
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कितने समय तक जीका के शिकार रहते हैं लोग
अब तक हुए शोध के अनुसार मच्छरों के काटने के करीब एक हफ्ते तक लोग जीका वायरस के शिकार रहते हैं। बता दें, अगर इसका वायरस वीर्य में पहुंच जाता है, तो ये करीब दो हफ्ते तक जिंदा रहता है। यही वजह है कि जीका प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित सेक्स संबंध बनाने की सलाह दी जाती है। ऐसे इलाकों में लोगों को रक्तदान करने से भी मना किया जाता है।
अब तक हुए शोध के अनुसार मच्छरों के काटने के करीब एक हफ्ते तक लोग जीका वायरस के शिकार रहते हैं। बता दें, अगर इसका वायरस वीर्य में पहुंच जाता है, तो ये करीब दो हफ्ते तक जिंदा रहता है। यही वजह है कि जीका प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित सेक्स संबंध बनाने की सलाह दी जाती है। ऐसे इलाकों में लोगों को रक्तदान करने से भी मना किया जाता है।
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बचाव के उपाय
जीका वायरस को फैलाने वाले मच्छर से बचने के लिए वही उपाय हैं जो आप डेंगू से बचने के लिए करते हैं। जैसे मच्छरदानी का प्रयोग, पानी को ठहरने नहीं देना, आस-पास की साफ-सफाई, मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहनना, मच्छरों को मारने वाली चीजों का इस्तेमाल और खून को जांचे बिना शरीर में ना चढ़वाना।हालांकि अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है कि जीका वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। जल्द ही ये बाजार में आ जाएगी।
जीका वायरस को फैलाने वाले मच्छर से बचने के लिए वही उपाय हैं जो आप डेंगू से बचने के लिए करते हैं। जैसे मच्छरदानी का प्रयोग, पानी को ठहरने नहीं देना, आस-पास की साफ-सफाई, मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहनना, मच्छरों को मारने वाली चीजों का इस्तेमाल और खून को जांचे बिना शरीर में ना चढ़वाना।हालांकि अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है कि जीका वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। जल्द ही ये बाजार में आ जाएगी।