सर्दी-जुकाम और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं बच्चों में काफी आम हैं। आमतौर पर ये परेशानियां खुद से या फिर हल्की-फुल्की दवाओं से आसानी से ठीक हो जाती हैं, पर बच्चों में लगातार बनी रहने वाली इन दिक्कतों के अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कई बार छोटे बच्चों में ये निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती हैं।
माता-पिता रहें अलर्ट: बच्चों में जानलेवा हो सकती है निमोनिया की समस्या, आपका बच्चा भी तो नहीं है शिकार?
Pneumonia In Children: निमोनिया बच्चों के फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से हो सकता है। छोटे बच्चों में तेजी से सांस चलने, छाती में जकड़न और दूध-पानी न पी पाना जैसे संकेत होते हैं। जानिए टीकाकरण-स्तनपान और बचाव के जरिए जोखिम कैसे कम करें?
बच्चों में निमोनिया क्यों होता है?
निमोनिया फेफड़ों का संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की छोटी वायु थैलियों में तरल पदार्थ या पस जमा हो जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह वायरस, बैक्टीरिया या कुछ मामलों में फंगस के संक्रमण से हो सकता है। छोटे बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी), न्यूमोकोकल बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमण इसका जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है।
- कुपोषण, इम्युनिटी में कमजोरी, समय से पहले जन्म और कुछ पहले से मौजूद बीमारियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
- घर में लकड़ी, कोयले या गोबर जैसे ईंधन से निकलने वाला धुआं, भीड़भाड़ और खराब वेंटिलेशन भी बच्चों के श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
- इसलिए बचाव के लिए सिर्फ दवा नहीं, बल्कि बच्चे के आसपास का वातावरण और पोषण भी महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों में निमोनिया की पहचान क्या है?
छोटे बच्चों में वैसे तो श्वसन समस्याएं होना काफी आम हैं, पर खांसी और बुखार के साथ तेज सांस चलने या सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं निमोनिया के संकेत हो सकती हैं। छोटे बच्चों में सांस लेते समय छाती का निचला हिस्सा अंदर धंसना गंभीर संकेत माना जाता है जिसे लेकर सभी लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।
- यदि बच्चा दूध या पानी नहीं पी पा रहा, बहुत सुस्त है या सांस लेने में गंभीर परेशानी है, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।
बच्चों को निमोनिया से कैसे बचाएं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों में निमोनिया के मामले गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं। इसलिए सभी माता-पिता को निमोनिया से बचाव के लिए सावधान रहने की सलाह दी जाती है। कुछ सामान्य से उपाय निमोनिया के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
सभी बच्चे को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार टीके लगवाएं। न्यूमोकोकल, खसरा और काली खांसी से बचाव के टीके निमोनिया से संबंधित कुछ संक्रमणों का जोखिम कम करने में मदद करते हैं।
- जन्म के पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराएं। इसके बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना जरूरी है।
- बच्चे के आसपास धुआं न होने दें। खाना पकाने में स्वच्छ ईंधन और उचित वेंटिलेशन का इस्तेमाल करें।
- हाथ धोने, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने और बीमार लोगों के निकट संपर्क को कम करने से भी बच्चों को इस संक्रमण से बचाया जा सकता है।
- निमोनिया के लक्षण दिखते ही तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं। समय पर इलाज होने से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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