दुनियाभर में कोरोना संक्रमण पिछले डेढ़ साल से कहर बरपा रहा है। कोरोना की आई दो लहरों में अब तक 17 करोड़ 79 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 38 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस में हो रहे म्यूटेशन और नए स्ट्रेन लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की पुष्टि की थी, जिसे कई मामलों में खतरनाक माना जा रहा है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के एक और नए वेरिएंट के बारे में सूचित किया है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में बताया है कि कोरोना के नए वेरिएंट 'लैम्ब्डा' के बारे में पता चला है। करीब 29 देशों ने लैम्ब्डा वेरिएंट के पाए जाने की सूचना दी है। इस वेरिएंट की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका में मानी जाती है।
सावधान: सामने आया कोरोना का एक और नया रूप, WHO ने घोषित किया 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट'
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कोरोना पर अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि सबसे पहले पेरू में इस नए वेरिएंट की पहचान की गई है। इसके प्रसार को देखते हुए इसे 'ग्लोबल वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस साल अप्रैल से पेरू में कोविड-19 के करीब 81 फीसदी मामलों को इसी वेरिएंट से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दो महीने में चिली में कोरोना के 32 फीसदी मामलों को 'लैम्ब्डा वेरिएंट' का ही कारण माना जा रहा है। इसके अलावा अर्जेंटीना और इक्वाडोर जैसे अन्य देशों ने भी इस नए वेरिएंट के मामलों के बारे में सूचित किया है।
हो सकता है अधिक संक्रामक
डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस में म्यूटेशन के कारण लैम्ब्डा वेरिएंट सामने आया है। अपेक्षाकृत अधिक संक्रामक होने के साथ इसकी एंटीबॉडीज रेजिस्टेंस भी अधिक हो सकती है। फिलहाल इस बात की पुष्टि करने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, लैम्ब्डा वेरिएंट को बेहतर ढंग से समझने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है। वैज्ञानिक निरंतर इस काम में लगे हुए हैं।
वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट का क्या मतलब है?
डब्ल्यूएचओ ने लैम्ब्डा वेरिएंट को 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका मतलब है कि इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत करने से पहले स्वास्थ्य संगठन इस वेरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता शक्ति की निगरानी करता रहेगा। इससे पहले वेरिएंट्स की प्रकृति के आधार पर डब्ल्यूएचओ, अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा को 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत कर चुका है।
पूर्व में डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की पहचान कर इसे 11 मई, 2021 तक 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया था। दुनियाभर में इसके तेजी से फैलने के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य संगठन ने इसे 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' की रूप में लेवल किया।
दूसरी लहर में कोरोना की गंभीर संक्रामकता के कारणों का पता लगा रहे विभिन्न भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक टीम ने हाल ही में डेल्टा वेरियंट (बी.1.617.2) के बारे में लोगों को सूचित किया। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन के निष्कर्ष में पाया गया है कि डेल्टा वेरियंट (बी.1.617.2) अन्य वेरियंट्स की तुलना में काफी अधिक संक्रामक हैं। अल्फा वेरियंट की तुलना में इसका ट्रांसमिशन भी 50 फीसदी से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा अल्फा की तुलना में डेल्टा वेरियंट का वायरल लोड भी अधिक पाया गया है। ताजा अपडेट में बताया गया है कि डेल्टा वेरिएंट कुछ म्यूटेशन के साथ 'डेल्टा प्लस' (AY.1) वेरिएंट में बदल गया है।
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स्रोत और संदर्भ:
world heart organisation
अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की साप्ताहिक रिपोर्ट में दी गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। वैक्सीनों की प्रभाविकता को लेकर अमर उजाला किसी तरह का दावा नहीं करता है।