नि:संतान मां-बाप के लिए आईवीएफ तकनीक बड़े काम की साबित हुई है। गांव-समाज में बांझपन का कलंक झेल रही महिलाओं के लिए तो यह तकनीक वरदान की तरह है। आईवीएफ तकनीक के जरिए मां-बाप बनने की प्लानिंग करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
आईवीएफ तकनीक से बनना चाहते हैं मां-बाप तो बड़े काम आएंगी ये जानकारियां
ऐसा नहीं है कि कोई महिला आईवीएफ करवाने गईं और अगले दिन यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। दरअसल यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई बार डॉक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर आप आईवीएफ के विकल्प को चुन रहे हैं तो आपको धैर्य और संयम रखने की जरूरत होती है।
आईवीएफ में शुरुआती 15 दिनों में दवाइयां दी जाती हैं ताकि ओवरीज मल्टीपल एग्स प्रड्यूस करने लगे। इस दौरान आपको हर दिन ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के लिए क्लिनिक जाना पड़ता है। स्टिमुलेशन प्रोसेस के बाद डॉक्टर महिला के शरीर से एग्स निकालकर पुरुष के स्पर्म के साथ उसे लैब में इन्फ्यूज करते हैं। 5 से 6 दिन बाद तैयार भ्रूण को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। इसके दो हफ्ते बाद इसकी जांच होती है कि आईवीएफ सफल रहा या नहीं।
हर कोई चाहता है कि आईवीएफ सफल हो और किसी तरह की समस्या न हो। इसके लिए कुछ चीजें जरूरी है, जैसे-
- आप पूरी तरह स्वस्थ हों, आपका वजन सही हो
- एल्कोहल या तंबाकू का सेवन ना करें
- फास्टफूड या जंकफूड से दूरी बनाकर रखें
- पोषण से भरपूर हेल्दी डायट लें
- आईवीएफ से पहले अपना मेडिकल टेस्ट करा लें
- हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल रखना भी जरूरी है
आईवीएफ के दौरान शरीर के हार्मोन में हो सकते हैं बदलाव
इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में कई हॉर्मोनल और इमोशनल बदलाव होते रहते हैं, जोकि इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
- पेल्विक एरिया में क्रैम्पिंग हो सकती है
- ब्रेस्ट में दर्द या नरमी हो सकती है
- कई बार आईवीएफ की वजह से ओवरीज ज्यादा अंडाणु बनाने लगती है
- इस वजह से वजन बढ़ने, पेट में सूजन होने या चक्कर आने जैसी दिक्कतें भी हो सकती है
(नोट: चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर तैयार यह लेख केवल आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए है। आईवीएफ तकनीक अपनाने से पहले विशेषज्ञ से बात कर लेना बेहतर होगा।)