शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार की पौष्टिकता पर ध्यान देना बहुत आवश्यक माना जाता है। हालांकि सिर्फ इतना ही पर्याप्त नहीं है, आप किस वक्त किन चीजों का सेवन कर रहे हैं इस बारे में भी ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है। विशेषतौर पर रात के खाने के वक्त आहार का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। रात के समय मेटाबॉलिज्म की दर कम होती है, ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डिनर को हमेशा हल्का रखने की सलाह देते हैं। वहीं जो लोग रात में भारी भोजन करते हैं उन्हें अक्सर पाचन से संबंधित समस्याएं बनी रहती हैं। डिनर में आहार का चयन भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
Alert: डिनर के समय यह छोटी सी गलती पाचन से लेकर नींद तक, कई समस्याओं का बन सकती है कारण, बरतें सावधानी
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रात के खाने से संबंधित इन महत्वपूर्ण बातों को भी जानिए
आहार विशेषज्ञ बताते हैं, रात का खाना 8 बजे तक खा लेना चाहिए। जल्दी खाना खाने से आपके सिस्टम को भोजन को बेहतर ढंग से पचाने में मदद मिलती है। एंडोक्राइन सोसाइटी के जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, देर से डिनर करने वाले लोगों में वजन बढ़ने और हाई ब्लड शुगर का खतरा अधिक हो सकता है। रात के खाने को हल्का रखने की भी सलाह दी जाती है। चूंकि रात में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, ऐसे में आपके द्वारा खाया गया भारी भोजन ठीक से पच नहीं पााता है। इसके कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं, आइए इस बारे में जानते हैं।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का खतरा
यदि आप रात में लगातार भारी भोजन करते हैं, तो आपका पाचन कमजोर हो सकता है और समय के साथ यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग, कब्ज और पेट फूलने का कारण बन सकता है। रात के समय में मेटाबॉलिज्म कम होने के कारण भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है जिससे पेट में लंबे समय तक बिना पचा हुआ भोजन बना रहता है। इससे न तो आपको भोजन से पर्याप्त पोषण ही मिल पाता है साथ ही यह पाचन विकारों को बढ़ावा देने वाली स्थिति भी हो सकती है।
हृदय गति में वृद्धि की समस्या
जब आप रात के समय में अधिक भोजन करते हैं, तो इस स्थिति में आपके हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय गति बढ़ सकती है। खाने से भी रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 2019 की वार्षिक बैठक में रिपोर्ट किए गए एक अध्ययन में कहा गया कि इस तरह की आदत रक्तचाप और रक्त शर्करा
को बढ़ाने का कारण हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ही इस तरह की दिक्कत रहती है उनके लिए यह और भी समस्याओं का कारण हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।