सामान्यतौर पर दिन का समय काम करने और रात का समय सोने और शरीर को आराम देने के लिए निर्धारित होता है। हालांकि कुछ विशेष प्रकार के कार्य से संबंधित लोगों को अलग-अलग शिफ्ट में काम करते रहने की जरूरत होती है। ऐसे में लोगों को रात के समय भी काम करना पड़ता है, आम बोलचाल की भाषा में इसे नाइट शिफ्ट वर्क कहा जाता है। डॉक्टर, नर्स, अग्निशामक, ड्राइवर, हवाई यातायात नियंत्रक और कुछ अन्य आवश्यक कार्यों से जुड़े लोगों को रात के समय काम करना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संबंधित क्षेत्र का काम अनवरत चलता रहे, इसके लिए नाइट शिफ्ट में काम होना आवश्यक है, पर सेहत के लिहाज से इसकी कई चुनौतियां हो सकती हैं।
सलाह: नाइट शिफ्ट में करते हैं काम तो सेहत को लेकर रहें अलर्ट, इन बातों का रखें विशेष ध्यान वरना हो जाएंगे बीमार
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कई तरह की समस्याओं का जोखिम
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, नाइट शिफ्ट और लंबे समय तक काम करने वाले लोगों में कई तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है। इनमें मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याओं, हृदय रोग, पाचन संबंधी कठिनाइयों, मोटापा और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों की नींद अक्सर पूरी नहीं हो पाती है, इसलिए इसका साइड इफेक्ट भी उनकी सेहत को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं कि किन बातों का ख्याल रखकर इन समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है?
नींद पूरी करने की कोशिश जरूरी
रात के समय नींद पूरी न होने के कारण थकान और चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ जाती है, नाइट शिफ्ट वाले लोगों में भी इस तरह की दिक्कत होना सामान्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रात में जागने से सर्कैडियन रिदम प्रभावित होता है, जिसके कारण व्यवहार और शारीरिक रूप से कई समस्याएं हो सकती हैं। इन दिक्कतों से बचे रहने के लिए काम शुरू करने से पहले एक छोटी नैप ले सकते हैं। नींद पूरी करने की कोशिश करें।
आहार का रखें ध्यान
शोध बताते हैं कि रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों में मेटाबोलिक सिंड्रोम का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा आहार ठीक न होने और स्लीप साइकिल डिस्टरबेंस के कारण मोटापे का खतरा 23 फीसदी तक बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को आहार को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन करें। जंक-प्रोसेस्ड फूड्स से बचें। रात में काम के दौरान खाते रहने की आदत नुकसानदायक हो सकती है।
बहुत अधिक कॉफी-चाय न पिएं
रात में अक्सर जागने के लिए लोग कॉफी-चाय का सेवन करते हैं। इनमें पाया जाना वाले कैफीन एक उत्तेजक के रूप में काम करता है, जो शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। हालांकि बहुत अधिक कैफीन का शरीर पर कई तरह से नकारात्मक असर भी हो सकता है। कैफीन वाली चीजों का अनुचित उपयोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं और मांसपेशियों में कंपन पैदा कर सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।