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Jo Lindner Death: एन्यूरिज्म के कारण 30 की ही उम्र में फिटनेस इन्फ्लुएंसर की मौत, जानिए क्या होती है ये बीमारी

Mon, 03 Jul 2023 07:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 03 Jul 2023 07:07 PM IST
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German fitness influencer Jo Lindner died from aneurysm, know symptoms and prevention of aneurysm
जो लिंडनर की 30 साल में मौत - फोटो : istock

पिछले कुछ वर्षों का डेटा देखें तो पता चलता है कि कम उम्र में ही मौत के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। हालिया मामला जर्मन फिटनेस इंफ्लुएंसर और बॉडीबिल्डर जो लिंडनर की मौत का है, वह महज 30 साल के थे। एक जुलाई को उनकी गर्लफ्रेंड ने इंस्टाग्राम पर लिंडनर की मौत की जानकारी साझा की तो फैन्स में मायूसी छा गई। लिंडनर की युवाओं के बड़ी फैन फॉलोइंग रही है और वह फिटनेस को लेकर लोगों को प्रोत्साहित करते रहते थे।



इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार उनकी मौत का कारण एन्यूरिज्म है। पिछले तीन दिनों से वह अपनी गर्दन में दर्द की शिकायत भी कर रहे थे। अपने आखिरी पोस्ट में 30 जून को ही लिंडनर ने बताया कि कुछ स्वास्थ्य समस्या के कारण वह टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले रहे हैं। 

पिछले कुछ महीनों में कम उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के कारण कम उम्र में मौत के मामले तो सामने आए थे, पर आखिर ये एन्यूरिज्म क्या समस्या है, जिसकी वजह से लिंडनर की मौत हुई। आइए इस बीमारी के बारे में समझते हैं।

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एन्यूरिज्म-धमनीविस्फार की समस्या - फोटो : Istock

एन्यूरिज्म क्या है?

एन्यूरिज्म को धमनीविस्फार के नाम से भी जाना जाता है। यह धमनियों की दीवार में कमजोरी के कारण इसमें होने वाले विस्तार की समस्या है। आमतौर पर इसमें कोई लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन धमनियों के बढ़ने के कारण अगर इसमें ब्रेक हो जाता है तो यह घातक जटिलताओं को जन्म दे सकती है।

एन्यूरिज्म की समस्या शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है पर ब्रेन में एन्यूरिज्म होने सबसे आम है। एक अनुमान के मुताबिक 40 फीसदी मामलों में रोगी की 24 घंटे के भीतर ही मौत हो जाती है।

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मस्तिष्क में एन्यूरिज्म की दिक्कत - फोटो : Pixabay

एन्यूरिज्म के क्या कारण हैं?

एन्यूरिज्म शरीर में विभिन्न प्रकार की धमनियों को प्रभावित कर सकता है। मस्तिष्क और हृदय को आपूर्ति करने वाली धमनियों पर इसका खतरा सबसे अधिक होता है। यह समस्या इंटरनल ब्लीडिंग का कारण बन सकती है। धूम्रपान और उच्च रक्तचाप को इस समस्या का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। तम्बाकू-धूम्रपान का सेवन करने वालों में न केवल हृदय रोग और धमनीविस्फार का खतरा बढ़ता है, बल्कि धमनियों के फटने का खतरा भी बढ़ा देती है।

अधिकांश मामलों में एन्यूरिज्म के कोई भी लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि अनियंत्रित धमनीविस्फार की समस्या ऊतकों में परिसंचरण को बाधित कर सकती है जिससे रक्त के थक्के भी बना सकते हैं।

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धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock

एन्यूरिज्म के कारण होने वाली समस्याएं

एन्यूरिज्म की समस्या वाले अधिकांश लोगों को किसी भी जटिलता का अनुभव नहीं होता है। हालांकि धमनियों के ब्रेक होने के कारण आपको कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।  

  • गंभीर छाती या पीठ दर्द:  महाधमनी में होने वाले एन्यूरिज्म के कारण गंभीर रूप से छाती या पीठ दर्द उत्पन्न हो सकता है।
  • कुछ प्रकार के एन्यूरिज्म से एनजाइना की समस्या भी हो सकती है, जिसमें सीने में दर्द के साथ धड़कनों में अनियमितता की समस्या और गंभीर मामलों में दिल का दौरा पड़ सकता है।
  • अचानक या अत्यधिक सिरदर्द होने की समस्या।
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धुम्रपान से एन्यूरिज्म का जोखिम - फोटो : Pixabay

एन्यूरिज्म से कैसे बचा जा सकता है?

एन्यूरिज्म से बचाव करना हमेशा संभव नहीं होता है, क्योंकि कुछ मामलों में यह जन्मजात हो सकता है। हालांकि, लाइफस्टाइल को सुधारने वाले उपाय करके इसमें लाभ पाया जा सकता है।

  • अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान छोड़ने से एन्यूरिज्म का खतरा कम हो सकता है।
  • रक्तचाप को नियंत्रित करने से एन्यूरिज्म से बचा जा सकता है। आहार संबंधी सावधानियां, नियमित व्यायाम और दवाओं से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें।
  • मोटापा हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, इसलिए धमनी की दीवारों पर तनाव को कम करने के लिए वजन को नियंत्रित रखें।
 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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