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जीवनशैली में गड़बड़ी और शारीरिक निष्क्रियता के कारण पिछले एक दशक में आर्थराइटिस (गठिया) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है। आर्थराइटिस, जोड़ों में सूजन और दर्द की एक गंभीर समस्या है, जिससे दुनियाभर में लाखों लोग परेशान हैं। भारत में पिछले कुछ वर्षों में इस रोग के मामलों में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में 180 मिलियन (18 करोड़) से ज्यादा लोगों को गठिया की समस्या है, इतना ही नहीं हर साल लगभग 14 लाख से अधिक नए लोगों को इलाज के लिए डॉक्टरों से संपर्क करने की आवश्यकता पड़ती है।
दुनियाभर में तेजी से बढ़ती इस गंभीर समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 12 अक्टूबर को 'वर्ल्ड आर्थराइटिस डे' मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गठिया के उपचार में लक्षणों को कम करने के साथ रोगी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा यदि जीवनशैली में कुछ सुधार कर लिया जाए तो इस गंभीर समस्या से बचाव किया जा सकता है। आइए इस बारे में विशेषज्ञ से जानते हैं।
World Arthritis Day 2021: जानिए गठिया की समस्या से बचे रहने के लिए क्या करें और क्या नहीं?
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यदि कम उम्र से ही भोजन की पौष्टिकता पर ध्यान दिया जाए तो भविष्य में गठिया की समस्या से सुरक्षित रहा सकता है। इसी से संबंधित ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि अनानास के जूस का सेवन करने वालों में गठिया रोग होने का खतरा कम होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस फल में ब्रोमेलैन नामक एक एंजाइम पाया जाता है जो गठिया के दर्द और सूजन को स्वाभाविक रूप से कम करने में सहायक माना जाता है।
शारीरिक निष्क्रियता के कारण बढ़ रहा है गठिया की समस्या
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जौहैब काजी बताते हैं समय के साथ बदलती दिनचर्या की कई आदतों ने लोगों में शारीरिक निष्क्रियता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। इसका असर सीधे हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। शारीरिक निष्क्रियता को आर्थराइटिस के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, उनमें आर्थराइटिस होने का खतरा कम होता है। इतना ही नहीं आर्थराइटिस के रोगी भी व्यायाम के माध्यम से इसकी जटिलताओं का कम कर सकते हैं।
आर्थराइटिस के रोगी को क्या करना चाहिए?
डॉ जौहैब बताते हैं, आर्थराइटिस के रोगियों को सही प्रकार की शारीरिक गतिविधियों का चुनाव करना चाहिए, ऐसे अभ्यास जो आपके जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को तो शक्ति पहुंचाएं लेकिन उनसे जोड़ों को नुकसान न हो। इस तरह के अभ्यासों के बारे में जानने के लिए किसी फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह जरूर लें। गठिया के दर्द से राहत देने के लिए कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं, पर ध्यान रहे अपनी स्थिति के आधार पर उपयुक्त दवा के लिए किसी डॉक्टर से सलाह जरूर लें। गठिया के रोगियों को स्वस्थ और संतुलित आहार लेने के साथ वजन को नियंत्रित रखना आवश्यक होता है। मोटापा या अधिक वजन होने से गठिया का दर्द और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
आर्थराइटिस के रोगी को क्या नहीं करना चाहिए?
डॉ जौहैब बताते हैं, आर्थराइटिस की समस्या से बचे रहने के लिए धूम्रपान से तुरंत दूरी बना लें। धूम्रपान, जोड़ों के दर्द और गठिया के अन्य लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसके अलावा शराब, हाई सोडियम, शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ और ज्यादा तली हुई चीजें शरीर में सूजन पैदा करती हैं इनसे भी बचाव आवश्यक है। यदि आप लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहते हैं तो इस आदत को बदलिए, समय-समय पर शरीर की स्ट्रेचिंग करते रहना आवश्यक है। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें।
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नोट: यह लेख डॉ जोहैब काज़ी (फिजियोथेरपिस्ट & कपिंग एकस्पर्ट) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।