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सीएसआईआर वैज्ञानिक ने बताया: ऐसी जगहों पर कम होगा डेल्टा प्लस वैरिएंट का असर, जानिए आप कितने सुरक्षित?

Sun, 25 Jul 2021 11:39 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 25 Jul 2021 11:39 AM IST
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कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट का कहर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस एक के बाद एक म्यूटेशन के साथ और खतरनाक होता जा रहा है। देश में कोरोना की दूसरी लहर का मुख्य कारक माना जा रहा डेल्टा वेरिएंट अब K417N म्यूटेशन के साथ 'डेल्टा प्लस वैरिएंट' में बदल गया है। अब तक के अध्ययनों में स्वाभाविक रूप से डेल्टा प्लस वैरिएंट को कहीं ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बताया गया है। कई रिपोर्टस में यहां तक दावा किया जा रहा है कि देश में आने वाली संभावित तीसरी लहर इसी डेल्टा प्लस वैरिएंट के कारण आ सकती है। 


डेल्टा प्लस वेरिएंट की प्रकृति को देखते हुए हाल ही में सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' घोषित कर दिया है। सरकार ने एक बयान में बताया है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं इसपर अध्ययन किया जा रहा है। डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर आई अब तक की रिपोर्टस का निष्कर्ष देखें तो यह वेरिएंट ज्यादा खतरनाक और चिंताजनक माना जा रहा है। इस संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर) के निदेशक डॉ अनुराग अग्रवाल ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

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कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा प्लस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट क्या है?
डॉ अनुराग बताते हैं, सार्स-सीओवी-2 वायरस में हुए एक नए म्यूटेशन को डेल्टा वैरिएंट (B.1.617.2) नाम दिया गया है। इस तरह के म्यूटेशन वायरस के स्पाइक प्रोटीन होते हैं जो उसे और अधिक संक्रामक बनाते हैं। यह अब तक दुनिया भर के 80 देशों में फैल चुका है। भारत के बाद अब यह ब्रिटेन, अमेरिका के कुछ राज्यों, सिंगापुर और दक्षिणी चीन में तेजी से फैल रहा है। डेल्टा वैरिएंट में K417N म्यूटेशन ने इसे डेल्टा प्लस के रूप में परिवर्तित कर दिया है।
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कोरोना के नए वेरिएंट ने बढ़ाई चिंता (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

डेल्टा प्लस वैरिएंट से ऐसे स्थान फिलहाल सुरक्षित
डॉ अनुराग कहते हैं, जिन स्थानों पर पहले डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण हो चुका है, वहां फिलहाल डेल्टा प्लस वैरिएंट का ज्यादा प्रभाव नहीं होने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण डेल्टा वैरिएंट संक्रमण के दौरान शरीर में बनी एंटीबॉडीज हैं। ऐसे स्थानों पर तत्काल खतरा होने की आशंका बहुत कम दिखती है। देश में डेल्टा प्लस के मामले फिलहाल बहुत तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं जो कि इस बात की काफी हद तक पुष्टि करते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार इसपर कड़ी नजर रखे हुए हैं क्योंकि स्वाभाविक रूप से तो डेल्टा प्लस वैरिएंट खतरनाक है ही।

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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर लोगों में डर - फोटो : Pixabay

तीसरी लहर कब आएगी?
डॉ अग्रवाल कहते हैं, इस समय लोग यही जानना चाह रहे हैं कि क्या कोरोना की तीसरी लहर आएगी, अगर आएगी तो कब? इस बारे में इतना कहा जा सकता है कि यह इतनी जल्दी नहीं आएगी। दूसरी लहर के मुख्य कारण के रूप में डेल्टा वेरिएंट को माना गया है, ऐसे में यह भी निश्चित है कि इस दौरान संक्रमित हुए लोगों में इसके खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा होगी। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी लहर का कोई गंभीर असर होगा, फिलहाल इसकी आशंका कम है। हां अगर इस बीच में सुरक्षात्मक उपायों को लेकर लापरवाही बरती गई, तो इसके शीघ्र आने की आशंका भी हो सकती है।

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कोरोना के टीका नए वेरिएंट्स पर कितने असरदार - फोटो : PTI
कोरोना के नए वैरिएंट्स पर कितने असरदार हैं टीके?
डेल्टा प्लस वेरिएंट पर टीके के प्रभाव को लेकर डॉ अग्रवाल कहते हैं, देश में टीकाकरण की रफ्तार तेज कर दी गई है। कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन देने की दिशा में काम किया जा रहा है। वैक्सीनेशन के कारण कोरोना की तीसरी लहर का आकार छोटा जरूर होगा। इस संक्रमण से बचाव के लिए हमारे पास एक ही मजबूत हथियार है वैक्सीन, जिन लोगों ने अब तक टीकाकरण नहीं कराया है उन्हें इसे जल्द से जल्द प्राप्त करना चाहिए। उचित सावधानी बरतने के साथ और टीकाकरण को बढ़ावा देकर कोरोना की तीसरी लहर और डेल्टा प्लस जैसे वैरिएंट से आसानी से मुकाबला किया जा सकता है। 

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नोट: यह लेख इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर) के निदेशक डॉ अनुराग अग्रवाल के सुझावों पर तैयार किया गया है। डॉ अनुराग ने अंग्रेजी अखबार द हिंदू से बातचीत में यह बातें बताई हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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