दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण के मामलों में फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। यूके, ब्राजील जैसे देशों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक बार फिर से लॉकडाउन जैसी स्थितियां बनती दिख रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित दुनियाभर के तमाम स्वास्थ्य संगठन डेल्टा वैरिएंट को बड़ी मुसीबत के तौर पर देख रहे हैं। इस वैरिएंट को डब्ल्यूएचओ ने 'वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न' के रूप में भी वर्गीकृत किया गया है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार भले ही धीमी पड़ गई हो लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेल्टा वैरिएंट्स के तमाम नए म्यूटेशनों को संभावित तीसरी लहर के कारण रूप में भी देख रहे हैं।
डेल्टा वैरिएंट्स: ऐसे लोग माने जा सकते हैं सुरक्षित, अध्ययन में सामने आई यह बड़ी बात
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डेल्टा वैरिएंट्स चिंता का विषय़
दुनियाभर के तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डेल्टा वैरिएंट्स में हुए म्यूटेशनों को काफी खतरनाक माना है। विशेषज्ञों के कहना है कि कोरोना के यह नए रूप हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा दे सकते हैं। इसके अलावा वायरस के स्पाइक प्रोटीन की संरचना में हो रहे बदलाव, इन्हें इंसानों की कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने के योग्य बना रहे हैं। यही कारण है कि डेल्टा वैरिएंट्स और इसके नए रूपों को कोरोना के मूल स्ट्रेन की तुलना में अधिक खतरनाक माना जा रहा है। भारत में दूसरी लहर के दौरान इसका भयानक रूप देखा जा चुका है।
किन्हें माना जा सकता है डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षित?
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी सहित देश के प्रमुख संस्थान के शोधकर्ताओं ने डेल्टा वैरिएंट से सुरक्षा के पैमानों को जानने के लिए अध्ययन किया। तमाम स्तर पर किए गए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड से ठीक हो चुके मरीज जिन्होंने वैक्सीन की एक या दोनों शॉट ले लिए हों, उन्हें डेल्टा वैरिएंट्स और इसके म्यूटेटेड स्वरूपों से सुरक्षित माना जा सकता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने कोविशील्ड वैक्सीन को भी इन वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार साबित होने का दावा किया है।
ऐसे लोगों को डेल्टा वैरिएंट्स से अतिरिक्त सुरक्षा
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अलग-अलग स्थिति वाले प्रतिभागियों को शामिल किया। इसमें वैक्सीन की एक डोज, दोनों डोज ले चुके लोगों के साथ कोविड से ठीक होने के बाद वैक्सीन की एक या दोनों डोज ले चुके लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ उनकी तुलना में कोरोना संक्रमित रह चुके लोग जिन्हें वैक्सीन की अतिरिक्त सुरक्षा मिल चुकी है, उन्हें ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है। वहीं जिन लोगों ने वैक्सीनेशन नहीं कराया है, उनमें डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा कहीं ज्यादा हो सकता है।
कोविड उपयुक्त व्यवहार सभी के लिए जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षित रहने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार को प्रयोग में लाना सबसे आवश्यक है। डबल मास्किंग आपको ज्यादा सुरक्षित रख सकती है। संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा हासिल करने और गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र तरीका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनियाभर में हुए तमाम अध्ययनों में वैक्सीनों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने में काफी असरदार माना गया है। ज्यादातर वैक्सीनों को कोरोना के डेल्टा वैरिएंट और इसके अन्य स्वरूपों के खिलाफ 51-94 फीसदी तक कारगर पाया गया है। कौन सी वैक्सीन ज्यादा असरदार है इसपर ध्यान देने से ज्यादा वैक्सीनेशन कराने को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।
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नोट: यह लेख इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी सहित देश के प्रमुख संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।
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