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डेल्टा वैरिएंट्स: ऐसे लोग माने जा सकते हैं सुरक्षित, अध्ययन में सामने आई यह बड़ी बात

Thu, 08 Jul 2021 02:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 08 Jul 2021 02:11 PM IST
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COVID recovered patients after vaccination are more protected against the Delta variant, expert says
डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण के मामलों में फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। यूके, ब्राजील जैसे देशों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक बार फिर से लॉकडाउन जैसी स्थितियां बनती दिख रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित दुनियाभर के तमाम स्वास्थ्य संगठन डेल्टा वैरिएंट को बड़ी मुसीबत के तौर पर देख रहे हैं। इस वैरिएंट को डब्ल्यूएचओ ने 'वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न' के रूप में भी वर्गीकृत किया गया है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार भले ही धीमी पड़ गई हो लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेल्टा वैरिएंट्स के तमाम नए म्यूटेशनों को संभावित तीसरी लहर के कारण रूप में भी देख रहे हैं।


इस बीच हाल के अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों को कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से सुरक्षित बताया है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने वैक्सीनेशन अभियान पर भी जोर दिया है। आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

COVID recovered patients after vaccination are more protected against the Delta variant, expert says
डेल्टा वैरिएंट्स ने दुनियाभर में मचाई तबाही (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay

डेल्टा वैरिएंट्स चिंता का विषय़
दुनियाभर के तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डेल्टा वैरिएंट्स में हुए म्यूटेशनों को काफी खतरनाक माना है। विशेषज्ञों के कहना है कि कोरोना के यह नए रूप हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा दे सकते हैं। इसके अलावा वायरस के स्पाइक प्रोटीन की संरचना में हो रहे बदलाव, इन्हें इंसानों की कोशिकाओं में आसानी से प्रवेश करने के योग्य बना रहे हैं। यही कारण है कि डेल्टा वैरिएंट्स और इसके नए रूपों को कोरोना के मूल स्ट्रेन की तुलना में अधिक खतरनाक माना जा रहा है। भारत में दूसरी लहर के दौरान इसका भयानक रूप देखा जा चुका है।

COVID recovered patients after vaccination are more protected against the Delta variant, expert says
किन्हें माना जा सकता है कोरोना से सुरक्षित (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

किन्हें माना जा सकता है डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षित?
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी सहित देश के प्रमुख संस्थान के शोधकर्ताओं ने डेल्टा वैरिएंट से सुरक्षा के पैमानों को जानने के लिए अध्ययन किया। तमाम स्तर पर किए गए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड से ठीक हो चुके मरीज जिन्होंने वैक्सीन की एक या दोनों शॉट ले लिए हों, उन्हें डेल्टा वैरिएंट्स और इसके म्यूटेटेड स्वरूपों से सुरक्षित माना जा सकता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने कोविशील्ड वैक्सीन को भी इन वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार साबित होने का दावा किया है।

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COVID recovered patients after vaccination are more protected against the Delta variant, expert says
कोरोना के नए वैरिएंट्स से बचाव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

ऐसे लोगों को डेल्टा वैरिएंट्स से अतिरिक्त सुरक्षा
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अलग-अलग स्थिति वाले प्रतिभागियों को शामिल किया। इसमें वैक्सीन की एक डोज, दोनों डोज ले चुके लोगों के साथ कोविड से ठीक होने के बाद वैक्सीन की एक या दोनों डोज ले चुके लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ उनकी तुलना में कोरोना संक्रमित रह चुके लोग जिन्हें वैक्सीन की अतिरिक्त सुरक्षा मिल चुकी है, उन्हें ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है। वहीं जिन लोगों ने वैक्सीनेशन नहीं कराया है, उनमें डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा कहीं ज्यादा हो सकता है।

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COVID recovered patients after vaccination are more protected against the Delta variant, expert says
कोरोना का नए वैरिएंट्स से बचाव बेहद जरूरी - फोटो : iStock

कोविड उपयुक्त व्यवहार सभी के लिए जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षित रहने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार को प्रयोग में लाना सबसे आवश्यक है। डबल मास्किंग आपको ज्यादा सुरक्षित रख सकती है। संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा हासिल करने और गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र तरीका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनियाभर में हुए तमाम अध्ययनों में वैक्सीनों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने में काफी असरदार माना गया है। ज्यादातर वैक्सीनों को कोरोना के डेल्टा वैरिएंट और इसके अन्य स्वरूपों के खिलाफ 51-94 फीसदी तक कारगर पाया गया है। कौन सी वैक्सीन ज्यादा असरदार है इसपर ध्यान देने से ज्यादा वैक्सीनेशन कराने को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।

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नोट: यह लेख इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी सहित देश के प्रमुख संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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