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वैज्ञानिकों का बड़ा दावा: श्वसन मार्ग की नहीं, रक्त वाहिकाओं की बीमारी है कोविड-19, जानिए इसकी मुख्य वजह

Tue, 31 Aug 2021 05:10 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 31 Aug 2021 05:10 PM IST
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covid-19 is a vascular disease, scientists claim
श्वसन पथ की बीमारी नहीं है कोविड-19? (सांकेतिक) - फोटो : iStock

पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से कोरोना का संक्रमण पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिक इसे रेस्पिरेटरी डिजीज यानी की श्वसन पथ की बीमारी बताते रहे हैं। हालांकि एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने व्यापक रूप से स्वीकार किए गए इस तथ्य को खारिज करते हुए दावा किया है कि कोरोना रेस्पिरेटरी नहीं, वैस्कुलर डिजीज है। सरल शब्दों में समझें को वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 श्वसन पथ की नहीं रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली बीमारी है।


यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-सैन डिएगो के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमितों में जिस तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, उसके आधार पर इसे वैस्कुलर डिजीज माना जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है, कोविड रोगियों में रक्त के थक्के और कोविड-फुट जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं, श्वसन संबंधी बीमारी में इस तरह के लक्षणों का होना असामान्य है। यह समस्या तभी होती है जब व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में कोई दिक्कत हो। ऐसे में कोविड-19 को वैस्कुलर डिजीज के रूप में देखे जाने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

covid-19 is a vascular disease, scientists claim
संचार प्रणाली की बीमारी बताई जा रही है कोविड-19 (सांकेतिक) - फोटो : iStock

रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है कोरोनावायरस
सर्कुलेशन रिसर्च नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि कोरोना का वायरस किस प्रकार से रक्त वाहिकाओं या संचार प्रणाली पर हमला कर सकता है। अध्ययन में वैज्ञानिक बताते हैं, वायरस का एस प्रोटीन एसीई2 रिसेप्टर पर अटैक करता है, जो कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पन्न करने वाले माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाता है। इस प्रकार से एंडोथेलियम को भी नुकसान पहुंचाता है, जो रक्त वाहिका को रेखाबद्ध करता है। 

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अध्ययन में सामने आई कई रोचक बातें - फोटो : Pixels

क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने कोरोना जैसा ही एक कृत्रिम वायरस बनाया। इसमें केवल एस प्रोटीन को रखा गया, इसका उद्देश्य यह पता करना था कि क्या यह प्रोटीन बीमारी पैदा करने के लिए अपने आप में पर्याप्त है? अध्ययन के बारे में विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर उरी मनोर कहते हैं, शोध के आधार पर हमें पता चला है कि कोविड-19 वास्तव में एक संवहनी रोग है। कोविड-19 से संक्रमित रोगियों में स्ट्रोक या शरीर के अन्य हिस्सों में समस्या क्यों होती है? इन सभी समस्याओं का एक कारण यह हो सकता है कि कोविड-19 वैस्कुलर डिजीज है और यह मुख्यरूप से रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है, श्वसन पथ को नहीं।

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कई लक्षणों के आधार पर दावा (सांकेतिक) - फोटो : Pixels

श्वसन रोगों में नहीं होते हैं इस तरह के लक्षण
स्पेन स्थित बेलविट्ज़ यूनिवर्सिटी हास्पिटल में इंटेसिव केयर के प्रमुख प्रोफेसर राफेल मानेज़ मेंडिलुस कहते हैं, वैस्कुलर डिजीज कोरोना के रोगी के प्रतिरक्षा प्रणाली के इंफ्लामेटरी रिस्पॉस से संबंधित हो सकती है। जिस तरह के लॉन्ग कोविड में लक्षण देखने को मिल रहे हैं, उनके आधार पर यह माना जा सकता है कि कोरोना का वायरस शरीर की रक्त वाहिकाओं का नुकसान पहुंचाता है। अगर यह श्वसन से संबंधित बीमारी होती है तो रोगियों में स्ट्रोक और कोविड फीट जैसे लक्षण देखने को नहीं मिलते। 

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संक्रमितों में देखे जा रहे हैं कई तरह के लक्षण (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

लॉन्ग कोविड के चलते रोगियों को हो रही हैं गंभीर दिक्कतें 
गौरतलब है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके रोगियों में लॉन्ग कोविड के रूप में कई गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों को कोविड-फुट की समस्या हो सकती है। कोविड के जिन रोगियों को डायबिटीज की समस्या थी, उनमें यह रोग और भी सामान्य हो जाता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 से ठीक होने के बाद लोगों में स्ट्रोक जैसी समस्याएं भी अधिक हो सकती है। इन सभी समस्याओं का मुख्य कारण रक्त वाहिकाओं में होने वाली दिक्कतें मानी जाती है।


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नोट: यह लेख  यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-सैन डिएगो के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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