प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत में कोरोना के बिगड़ते हालात पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कोरोना से लड़ाई में 'टेस्ट, ट्रेस और आईसोलेट' के मूल मंत्र को फिर से दोहराया। इसके अलावा वैक्सीन पर एक प्रेजेंटेशन भी राज्यों के साथ साझा की गई। उन्होंने कहा, 'कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनियाभर से खबरें आ रही हैं। दुनिया में और हमारे देश में भी कई वैक्सीन रिसर्च का काम आखिरी स्टेज में पहुंचा है। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर नजर रखे हुए है। उनसे संपर्क में भी है। अभी ये तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होगी या तीन डोज होगी। ये भी तय नहीं है कि इस वैक्सीन की कीमत कितनी होगी, उस वैक्सीन की कीमत कितनी होगी। यानी इन सभी सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। जो इसके बनाने वाले हैं उनमें सरकारें भी हैं, कॉरपोरेट वर्ल्ड भी है, अलग-अलग प्रतिस्पर्धा है, देशों के भी अपने-अपने राजनयिक हित भी हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी इंतजार करना पड़ता है। इसलिए वैश्विक संदर्भ में ही हमें भी आगे बढ़ना पड़ेगा।'
Coronavirus Vaccine: क्या भारत के लिए सबसे बेहतर है ऑक्सफोर्ड वैक्सीन? जानिए इसके बारे में सबकुछ
दरअसल सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कोरोना वैक्सीन को लेकर चार सवाल पूछे थे। उन्होंने लिखा था कि
- भारत सरकार किस कोरोना वैक्सीन कैंडिडेट को चुन रही है और क्यों?
- किन लोगों को वैक्सीन लगाने में प्राथमिकता दी जाएगी और कैसे वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाया जाएगा?
- क्या पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल मुफ्त टीकाकरण के लिए किया जाएगा?
- कब तक भारत के सभी लोगों का टीकाकरण संभव हो पाएगा?
कोरोना वैक्सीन पर प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
इनमें से पीएम केयर्स फंड के सवाल के अलावा प्रधानमंत्री ने दूसरे सभी सवालों का जवाब मंगलवार की बैठक में दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, भारत सरकार ने फिलहाल किसी कोरोना वैक्सीन के कैंडिडेट को नहीं चुना है। वैक्सीन किसको पहले लगेगी, इसका मोटा खाका तैयार है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन और राज्य सरकारों से बातचीत के बाद ही फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा। इसके पहले भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कह चुके हैं कि हेल्थ वर्कर्स और 65 साल से अधिक उम्र वालों को कोरोना के टीकाकरण अभियान में प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने ये भी बताया कि टीकाकरण का अभियान लंबा चलने वाला है। कुछ जानकारों की राय में इसमें कई साल लग सकते हैं, लेकिन सब कुछ वैक्सीन आने और उसके कारगर होने, उसके कितने डोज की जरूरत पड़ेगी, इन सब बातों पर निर्भर करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी साफ किया कि वैक्सीन के लिए स्पीड भी जरूरी है और सेफ्टी भी। इसलिए जो भी वैक्सीन भारत सरकार अपने नागरिकों को देना तय करेगी, वो सभी वैज्ञानिक कसौटी पर खरी उतरेगी।
इस समय वैक्सीन की रेस में दो भारतीय वैक्सीन आगे चल रहे हैं, जिनमें से एक भारत बायोटेक और आईसीएमआर के साथ मिल कर बनाई जा रही कोवैक्सीन है। दूसरे देशों में जो प्रयास चल रहे हैं, उनमें से ऑक्सफोर्ड की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन पर भारत सरकार का सबसे बड़ा दांव लगा है। हालांकि केंद्र सरकार ने खुलकर इस बारे में कभी नहीं कहा कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के लिए अब तक कोई करार किया है या नहीं या फिर वैक्सीन के लिए ऑर्डर भी दिए हैं या नहीं।
ऑक्सफोर्ड वैक्सीन क्या भारत के लिए सबसे बेहतर है?
भारत में अब तक जिन वैक्सीन के शुरुआती नतीजे सामने आए हैं, उनमें से ऑक्सफोर्ड वैक्सीन सबसे उपयुक्त मानी जा रही है, जानकार इसके पीछे तरह तरह की दलीलें दे रहे हैं। जैसे-
ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को स्टोर करना आसान है
भारत सरकार अगर ऑक्सफोर्ड वैक्सीन खरीदने का फैसला करती है, तो भारत सरकार को वैक्सीन स्टोर करने के लिए अलग से बहुत मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को नार्मल फ्रिज कंडीशन में स्टोर किया जा सकता है जबकि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन के लिए अलग से कोल्ड स्टोरेज पर काम करना होगा। इन दोनों वैक्सीन को माइनस 20 से माइनस 70 डिग्री के तापमान की जरूरत पड़ेगी।