दुनिया में ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं, जो बहुत ही गंभीर होती हैं, लेकिन हमें उनका पता तक नहीं चल पाता। ऐसी ही एक बीमारी है ब्लैक लंग डिजीज, यानी इस बीमारी में फेफड़े काले हो जाते हैं। इस बीमारी को कोल वर्कर्स नीमोकोनॉयोसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी गंभीर जरूर है, लेकिन यह आनुवंशिक नहीं है और न ही यह संक्रामक है। हालांकि दुनियाभर में कोयला खदानों में काम करने वाले लाखों लोगों को इसका खतरा हो सकता है, क्योंकि यह बीमारी तब होती है जब कोई व्यक्ति कोयले की धूल के संपर्क में ज्यादा रहता है। इससे उनके फेफड़ों में धूल के कण चले जाते हैं और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के कारण और लक्षणों के बारे में...
बीमारी: आखिर फेफड़े क्यों हो जाते हैं काले? जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
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ब्लैक लंग डिजीज के कारण?
- ब्लैक लंग डिजीज को नौकरी से जुड़ी बीमारी माना जाता है। जब आप लंबे समय तक कोयले की धूल में सांस लेते हैं, तो आपको यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। जैसे ही आप कोयले की धूल में सांस लेते हैं, उसके कण आपके वायुमार्ग और फेफड़ों में जाकर बैठ जाते हैं। इससे सूजन हो सकती है और बाद में फेफड़े पूरी तरह काले पड़ जाते हैं। हालांकि इस बीमारी के होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि धूल शरीर में कितनी अंदर तक गई है और कितने समय से चली आ रही है।
ब्लैक लंग डिजीज के लक्षण
- अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक, ब्लैक लंग डिजीज के लक्षण विकसित होने में सालों लग सकते हैं। शुरुआती चरणों में इसके सबसे आम लक्षण खांसी, सांस की तकलीफ और सीने में जकड़न हैं। कुछ समय के बाद खांसी में काली बलगम भी आ सकती है। अगर बीमारी गंभीर है, तो यह ऑक्सीजन को ब्लड तक पहुंचने से रोक सकता है और इससे हृदय और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंच सकता है।
ब्लैक लंग डिजीज से बचने के उपाय
स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देने वाली वेबसाइट वेबएमडी (WebMD) के मुताबिक, अगर आप कोयला खदानों में काम करते हैं, तो कुछ उपायों को अपनाकर इस बीमारी से बच सकते हैं, जैसे-
- काम करते समय मास्क पहनें
- त्वचा पर बैठी धूल को साफ करते रहें
- खाना खाने या पानी पीने से पहले अपने हाथों और चेहरे को अच्छी तरह से धोएं
- धूम्रपान से परहेज करें
- नियमित तौर पर छाती का एक्स-रे कराएं
- अगर कोई परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें