डॉ. विपिन जैन
बाल रोग विशेषज्ञ
कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन का सबसे ज्यादा असर युवाओं में देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 20 से 40 आयु वर्ग वाले लोगों को वायरस का यह नया स्ट्रेन ज्यादा शिकार बना रहा है। इतना ही नहीं इस बार संक्रमित लोगों को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका मतलब है कि कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन फेफड़ों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि अगर बच्चों को कोरोना संक्रमण हो जाए तो क्या उनके फेफड़े वायरस के संक्रमण को झेलने में सक्षम हैं?
आइए जानते हैं कि इस बारे में बाल रोग विशेषज्ञ का क्या कहना है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन जैन बताते हैं कि अब तक के मामलों के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्चों में कोरोना के मामले फिलहाल ज्यादा नहीं हैं। जो बच्चे संक्रमित हो भी रहे हैं उनमें से ज्यादा बच्चे सामान्य दवाइयों से कुछ ही दिनों में ठीक भी हो जा रहे हैं। कोरोना वायरस बच्चों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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बच्चों के फेफड़े पर कोरोना वायरस के प्रभाव के बारे में डॉ. विपिन बताते हैं कि बच्चों को सांस लेने की दिक्कत कम हो रही है। चूंकि बच्चों को आमतौर पर पहले से कोई गंभीर रोग नहीं होता है ऐसे में वायरस का असर उनके फेफड़ों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर रहा है। हालांकि जिन बच्चों को जन्मजात हृदय रोग, किडनी या मानसिक रोगों की दिक्कत है सिर्फ उन्हें खतरा ज्यादा हो सकता है।
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कैसे रखे कोरोना में बच्चों का ध्यान
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बच्चों को कोरना हो जाए तो क्या करें?
डॉ विपिन कहते हैं कि अगर बच्चों को कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, अब तक देखने को मिला है कि बच्चों पर इसका ज्यादा असर नहीं हो रहा है। दवाइयों के बजाय इस समय होम केयर की ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा बुखार और खांसी जैसे लक्षणों को सामान्य दवाओं के साथ ठीक किया जा सकता है। तेज बुखार के दौरान भी एसी- कूलर आदि चालू रखें, जिससे शरीर की ठंडक बनी रही। बार -बार पट्टी करते रहें।
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घर पर रखें बच्चों का ध्यान
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घर पर कैसे रखें बच्चों का ख्याल
कोरोना के समय में बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए समय-समय पर पानी और जूस देते रहें। यहां एक बात का ध्यान जरूर दें कि बच्चों के काढ़ा या घरेलू उपचार आदि खुद से न दें। इसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। कई घरेलू उपचार बच्चों के लिए कोरोना से ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।