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सिर्फ कैंसर ही नहीं डीएनए में बदलाव का भी कारण बन सकता है धूम्रपान

Sat, 12 Jan 2019 04:03 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 12 Jan 2019 04:03 PM IST
सार

  • सर्वे में सिगरेट पीने वाले 16000 लोगों में से सात हजार का डीएनए  बदला मिला।
  • धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषाें की संख्या का 10वां हिस्सा।
  • सिगरेट छोड़ने के एक साल बाद दिल की बीमारी का खतरा 50 फीसदी कम हो जाता है।
  • धूम्रपान करने वालों की कुल संख्या 6.1 करोड़ से बढ़कर 7.7 करोड़ तक पहुंच गई है।

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DNA के लिए भी हानिकारक है धूम्रपान - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

आपने विज्ञापनों या अपने शुभचिंतकों से अक्सर यह सुना होगा कि धूम्रपान से कर्क रोग होता है। मगर अगर कोई आपसे कहे कि धूम्रपान आपका डीएनए तक बदल देता है तो आप क्या कहेंगे? हाल ही में आई यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल की रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है। रिपोर्ट के मुताबिक बीड़ी-सिगरेट का धुंआ खून का डीएनए बदल देता है। 

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रिपोर्ट की मानें तो साल 2016 में जहां 84.9 अरब सिगरेट बेचीं गई वहीं 2017 में इस आंकड़े में 12.3 अरब की कमी आई और यह 72.6 अरब हो गया। सिगरेट का बाजार लगभग चार फीसदी तक कम हुआ है। कहा जा रहा है कि यह तीन फीसदी और कम हो सकता है। हमारे देश में इस वक्त करीब 12 करोड़ पुरुष धूम्रपान करते हैं। 
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यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इनवायरमेंटल हेल्थ की ताजा रिसर्च कहती है कि धूम्रपान से डीएनए तेजी से बदल रहा है। सिगरेट पीने वाले 16000 लोगों के बीच किए गए अध्ययन में पाया गया कि लगभग सात हजार लोगों का डीएनए बदल चुका था।
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ब्रिटिश जनरल में भी ऐसी ही एक अन्य रिपोर्ट के हवाले से इस बात के प्रमाण दिए गए हैं कि सिगरेट का धुआं शरीर के अंदर कोशिकाओं से छेड़छाड़ करता है। ऐसे नुकसान भी होते हैं जो शायद कभी नजर नहीं आए। साइंस जनरल में प्रकाशित आर्टिकल में ब्रिटिश प्रोफेसर ने कहा है कि जो कोशिकाएं धुएं के प्रत्यक्ष संपर्क में आती हैं उनके डीएनए में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है।

सिगरेट के साथ जिंदगी भी हो रही खत्म 

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डीएनए

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के प्रोफेसर प्रभात झा के मुताबिक भारत में 2010 में पूरे साल जितने लोगों की मौत हुई उसमें 10 फीसदी मौतें सिगरेट पीने से हुई थी। मरने वालों में तीस फीसदी वो लोग थे वो जिनकी उम्र 30 साल से कम थी। 

2017 के आंकड़े बताते हैं कि शहरी इलाकों में धूम्रपान करने वाले युवाओं की संख्या में 68 फीसदी का इजाफा हुआ है। अब इनकी तादाद 1.9 करोड़ से बढ़कर 3 करोड़ हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़त 26 फीसदी है। धूम्रपान करने वालों की कुल संख्या 6.1 करोड़ से बढ़कर 7.7 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें महिलाओं की संख्या पुरुषाें की संख्या का 10वां हिस्सा है। 2015 में लगभग 1.1 करोड़ महिलाएं धूम्रपान का शिकार थी। एक रिपोर्ट की मानें तो युवाओं ने धूम्रपान की आदत में कमी लाई है मगर धूम्रपान करने वालों की संख्या में कमी नहीं आई सकी है।

सिगरेट पीने के के दौरान नब्ज बढ़ जाती है क्योंकि सिगरेट में मौजूद निकोटिन अनुकंपी तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर देता है। आखिरी सिगरेट के 20 मिनट बाद नब्ज की दर और ब्लड प्रेशर दोबारा सामान्य हो जाते हैं।

सिगरेट छोड़ने के महीनेभर बाद रक्त सप्लाई बेहतर हो जाती है। फेफड़ों द्वारा ऑक्सीजन लेना 30% तक बढ़ जाता है। खांसी का दौरा भी कम हो जाता है, फेफड़ों की सफाई करने वाले सिलिया दोबारा से उग जाते हैं। धूम्रपान नहीं करने वालों में धूम्रपान नहीं करने वालों के मुकाबले हार्ट अटैक की दर 70 फीसदी अधिक होती है। सिगरेट पीने से स्वाद और गंध की समझ भी प्रभावित होती है। यह समझ आखिरी सिगरेट के दो दिन बाद सामान्य होने लगती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo

कार्बन मोनोऑक्साइड की वजह से प्रभावित कोशिकाएं ऑक्सीजन नहीं ले जा पातीं। सिगरेट छोड़ने के 12 घंटे बाद खून में मोनोऑक्साइड का स्तर गिर जाता है और खून में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य हो जाता है। 

सिगरेट छोड़ने के एक साल बाद दिल की बीमारी का खतरा 50 फीसदी कम हो जाता है। वहीं फेफड़ों के कैंसर से मौत का जोखिम 10 साल में आधा हो जाता है। 15 साल बाद कोरोनरी हृदय रोग का उतना ही होता है मानों कभी सिगरेट पी ही न हो।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में विश्व की कुल उत्पादित सिगरेट का 12 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल होता है।

सबसे ज्यादा सिगरेट पीने वाले देशों की लिस्ट

वर्ल्ड एटलस ने जारी की है सबसे ज्यादा सिगरेट पीने वाले देशों की लिस्ट
 
देश प्रतिशत
नॉर्थ कोरिया  58.6% 
ग्रीस  51.1%
नाऊरू  49.3% 
रूस  48.3% 
यूक्रेन  43.3% 
ऑस्ट्रिया  43.3% 
बेलारूस  42.4% 
सर्बिया  42.3% 
बोस्निया-हर्जेगोविना 42.2% 
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