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पहली बार नहीं हुई 'सर्जिकल स्ट्राइक', 6 बार भी ऐसे ही दुश्मनों से लिया गया है 'बदला'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 02 Oct 2016 11:02 AM IST
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सर्जिकल ऑपरेशन
- फोटो : Anil Kumar
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उड़ी में हुए आतकंवादी हमले के बाद बुधवार-गुरुवार की रात सेना ने एलओसी पार करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान 38 आतंकवादी मारे गए। वहीं, आतंवादियों के 7 ठिकाने भी नष्ट कर दिए। बताते चलें कि यह पहला मौका नहीं है, जब किसी देश ने सर्जिकल स्ट्राइक किया हो। इससे पहले भी कई मौके आए हैं, जब सेना ने विशेष अभियान चलाते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया।
सर्जिकल ऑपरेशन
म्यांमार ने भारतीय सेना ने किया था सर्जिकल ऑपरेशन
4 जून 2015 को नागा उग्रावादियों ने चंदेल एरिया में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इस दौरान हमारे 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना की 70 सैनिकों की एक टीम ने म्यामार के जंगलों में सर्जिकल ऑपरेशन किया। 40 मिनट चले इस सर्जिकल ऑपरेशन में 38 नागा उग्रवादियों को मौत के घाट उतारा गया था। वहीं, 7 नागा उग्रवादी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
4 जून 2015 को नागा उग्रावादियों ने चंदेल एरिया में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इस दौरान हमारे 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना की 70 सैनिकों की एक टीम ने म्यामार के जंगलों में सर्जिकल ऑपरेशन किया। 40 मिनट चले इस सर्जिकल ऑपरेशन में 38 नागा उग्रवादियों को मौत के घाट उतारा गया था। वहीं, 7 नागा उग्रवादी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
लादेन
पाकिस्तान के एबटाबाद में लादने पर अमेरिका की कार्रवाई
विश्व के लिए चिंता का सबब बन चुके और अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था। मई 2011 में अमेरिकी सेना की स्पेशल टास्क फोर्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित एक घर में कार्रवाी करते हुए ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। यह एक प्री प्लान हमला था, जिसे सीआईए ने संचालित किया था।
विश्व के लिए चिंता का सबब बन चुके और अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था। मई 2011 में अमेरिकी सेना की स्पेशल टास्क फोर्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित एक घर में कार्रवाी करते हुए ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। यह एक प्री प्लान हमला था, जिसे सीआईए ने संचालित किया था।
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ऑपरेशन ब्लैक सेप्टेंबर
मोसाद की ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर पर योजना
साल 1972 में ओलंपिक खेलों के आयोजन के दौरान ओलंपिक विलेज में हथियारों से लैस आतंकवादी घुस गए। ये फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन से जुड़े आतंकी थे। उन्होंने 11 इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। इसके बाद उन्होंने जेलों में बंद 234 फलस्तीनियों को रिहा करने की मांग रखी।
इसके बाद इजरायली सेना ने खुफिया एजेंसी मोसाद टीम के शॉर्प शूटरों ने आतंकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख आतंकियों ने निहत्थे खिलाड़ियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। एक हेलीकॉप्टर को बम से उड़ा दिया गया। फिर दूसरे हेलीकॉप्टर में बैठे खिलाड़ियों को भी गोलियों से भून दिया गया। कुछ ही मिनटों में एयरबेस पर मौजूद हर आतंकी मारा गया। साथ ही इजरायल के 9 खिलाड़ी भी आतंकियों की गोलियों के शिकार बन गए। फलस्तीनी आतंकवादियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों को म्यूनिख ओलंपिक में बंधक बनाया, और उन्हें मार दिया। इस खौफनाक मिशन को अंजाम देने वाले 8 आतंकी भी मारे गए।
साल 1972 में ओलंपिक खेलों के आयोजन के दौरान ओलंपिक विलेज में हथियारों से लैस आतंकवादी घुस गए। ये फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन से जुड़े आतंकी थे। उन्होंने 11 इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। इसके बाद उन्होंने जेलों में बंद 234 फलस्तीनियों को रिहा करने की मांग रखी।
इसके बाद इजरायली सेना ने खुफिया एजेंसी मोसाद टीम के शॉर्प शूटरों ने आतंकियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख आतंकियों ने निहत्थे खिलाड़ियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। एक हेलीकॉप्टर को बम से उड़ा दिया गया। फिर दूसरे हेलीकॉप्टर में बैठे खिलाड़ियों को भी गोलियों से भून दिया गया। कुछ ही मिनटों में एयरबेस पर मौजूद हर आतंकी मारा गया। साथ ही इजरायल के 9 खिलाड़ी भी आतंकियों की गोलियों के शिकार बन गए। फलस्तीनी आतंकवादियों ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों को म्यूनिख ओलंपिक में बंधक बनाया, और उन्हें मार दिया। इस खौफनाक मिशन को अंजाम देने वाले 8 आतंकी भी मारे गए।
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व्रेथ ऑफ गॉड
इजरायली सेना के 'रैथ ऑफ गॉड'
इजरायली सेना ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिनका वास्ता ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर से था। इस मिशन को नाम दिया गया 'रैथ ऑफ गॉड' । म्यूनिख नरसंहार के दो दिन के बाद इजरायली सेना ने सीरिया और लेबनान में मौजूद फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के 10 ठिकानों पर बमबारी की और करीब 200 आतंकियों और आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया।
इजरायली सेना ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिनका वास्ता ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर से था। इस मिशन को नाम दिया गया 'रैथ ऑफ गॉड' । म्यूनिख नरसंहार के दो दिन के बाद इजरायली सेना ने सीरिया और लेबनान में मौजूद फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के 10 ठिकानों पर बमबारी की और करीब 200 आतंकियों और आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया।