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पाक आर्मी चीफ का कार्यकाल बढ़ाने के सवाल पर नवाज शरीफ की बोलती बंद

Sat, 24 Sep 2016 11:43 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Sep 2016 11:43 AM IST
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Pakistan PM Nawaz sharif didnt reply on question ragarding Army Chief Raheel sharif
नवाज शरीफ - फोटो : Getty Images
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ भले ही भारत के साथ इंच-इंच की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे हो, लेकिन पाकिस्तानी आर्मी और नवाज शरीफ के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दौरान राहील शरीफ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में नवाज शरीफ की प्रतिक्रिया तो यही कहती है। 
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दरअसल, 21 सितंबर को नवाज शरीफ पाकिस्तान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान एक पत्रकार ने इस आशय का सवाल पूछ लिया। पत्रकार का सवाल इस संदर्भ में था कि 'ब्रिटेन के आर्मी चीफ ने पाकिस्तान आर्मी और सेना प्रमुख राहील शरीफ की बहुत तारीफ की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान आर्मी और सेनाध्यक्ष ने दहशतगर्दी के खिलाफ शानदार काम किया है। इन सब चीजों को मद्देनजर रखते हुए भविष्य में हम क्या यह सोच सकते हैं कि प्रधानमंत्री सेनाध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ाएंगे?
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पाकिस्तानी पत्रकार के इस लंबे चौड़े सवाल का जवाब नवाज शरीफ ने सिर्फ तीन शब्दों में बेहद खामोशी के साथ दिया। जवाब था - कोई और सवाल।

नवंबर में रिटायर होंगे राहील शरीफ

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सेनाध्यक्ष से जुड़े सवाल के जवाब में नवाज शरीफ की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आर्मी के साथ उनके रिश्ते सहज नहीं हैं। मौके बेमौके पर यह स्पष्ट होता आया है। गौरतलब है कि राहील शरीफ की नियुक्ति नवाज शरीफ ने ही की थी। पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष ने 29 नवंबर 2013 को पूर्व सेनाध्यक्ष अशफाक परवेज कयानी की जगह ली थी। 

राहील शरीफ पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ के तौर पर नवंबर 2016 में रिटायर होंगे। इस तरह राहील शरीफ के पास सिर्फ दो महीने का वक्त बचा है। भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच शुक्रवार को पाकिस्तान सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ ने कहा था कि उनकी सेना पाकिस्तानी सरजमीं के एक-एक इंच की रक्षा करेगी। चाहे इसके लिए उसे कोई भी कीमत चुकानी पड़ी। 

गौरतलब है कि उत्तरी कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के मिलिट्री बेस पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान को कड़े सबक सिखाने की मांग की जा रही है। साथ ही आतंक को पनाह देने के लिए विश्व पटल पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दांवपेंच भी चल रहे हैं। भारत की ओर से पाकिस्तान को झुकाने के लिए सिंधु नदी जल समझौते पर पुर्नविचार और पानी रोकने की योजना पर विचार से जुड़ी खबरें भी सामने आ रही है।

मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन आतंकवाद

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इस बीच संयुक्त राष्ट्र सभा में नवाज शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मसला एक बार फिर उठाया। उन्होंने मारे गए हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी को कश्मीर की नई पीढ़ी का हीरो तक बता डाला। इसके जवाब में भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। यूएन में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी ऐनम गंभीर ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को आडे़ हाथों लिया। 

ऐनम ने अपने संबोधन में कहा, 'मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन आतंकवाद है। अगर इसका इस्तेमाल देश की नीति के तौर पर होता है तो यह एक युद्ध अपराध है। हमारा देश और पड़ोसी मुल्क आतंकवाद को समर्थन देने से जुड़े पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही पॉलिसी के भुक्तभोगी है।'

उन्होंने ने कहा कि भारत पाकिस्तान को एक आतंकी देश के रूप में देखता है, जो अपने पड़ोसियों के खिलाफ छेड़े गए परोक्ष आतंकी युद्धों में अरबों डॉलर का इस्तेमाल आतंकी समूहों के प्रशिक्षण, वित्त पोषण और मददे के लिए करता है। इसमें से अधिकतर राशि अंतरराष्ट्रीय मदद से मिलती है। 
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