एक तरफ जहां चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सेना वापसी का ढोंग रच रहा है। दूसरी ओर सीमा पर तेजी से रेल और सड़कों का जाल बिछा रहा है। भारत ने भी अब चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी कर ली है। भारत ने अपनी सीमा क्षेत्र तक रेल और सड़क संपर्क को मजबूत करना तेज कर दिया है।
विकास की नई इबारतः पूर्वोत्तर में बढ़ रहा है रेलवे का नेटवर्क, चीन को उसी की भाषा में जवाब देने को तैयार भारत
पूर्वोत्तर की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है। कुछ साल पहले, केंद्र सरकार ने एक बहु-चरणीय कनेक्टिविटी परियोजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों की राजधानियों को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ना था। उसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं।
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मिजोरमः कुतुब मीनार से भी ऊंचा है पुल
- नामः भैरबी-साइरंग नई रेल लाइन
- कुल लंबाई 51.38 किलोमीटर
- कुल स्टेशनः चार
- पुलः 55 बड़े पुल और 89 छोटे पुल हैं
- समयः जुलारई, 2025
मिजोरम की राजधानी ऑइजोल को जोड़ने के लिए नई रेल लाइन भैरबी से साइरंग तक बिछाई जा रही है। इसकी कुल लंबाई 51.38 किलोमीटर है और इसमें चार स्टेशन होंगे। 93 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। परियोजना में कुल 55 बड़े पुल और 89 छोटे पुल हैं। पुल संख्या 196 के स्तंभ पी- 4परियोजना का सबसे ऊंचा स्तंभ है। इसकी ऊंचाई 104 मीटर है, जो कुतुब मीनार से 42 मीटर ऊंचा है। इस परियोजना में 5 रोड ओवर ब्रिज और 6 रोड अंडर ब्रिज भी शामिल हैं।
सिक्किमः थर्राएगा ड्रेन का कलेजा
- नामः सेवोक-रंगपो परियोजना
- कुल लंबाई 44.96 किलोमीटर
- कुल स्टेशनः पांच
- सुरंगः 14
- पुलः 22
- समयः जुलाई, 2025
सेवक (पश्चिम बंगाल) और रंगपो (सिक्किम) को जोड़ने वाली सेवक-रंगपो नई रेल लिंक परियोजना लगभग 45 किलोमीटर लंबी है। यह ट्रेन एलएसी से सट कर चलेगी। इसमें 14 टनल, 17 पुल और 5 स्टेशन शामिल हैं। तिस्ता भारतीय रेलवे का पहला भूमिगत स्टेशन होगा (मेट्रो को छोड़कर)। पूरी परियोजना का लगभग 38.6 किलोमीटर हिस्सा टनल से गुजरेगा। 93 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दार्जिलिंग जिले में हनुमान झोरा के पास स्थित 600 मीटर की एक निकासी टनल के साथ मुख्य टनल टी-04 की लंबाई 3948 मीटर है जबकि टी-13 की लंबाई 2560 मीटर है, जो परियोजना के पश्चिम बंगाल हिस्से का अंतिम टनल है और कलिम्पोंग जिले में स्थित है।
बदल जाएगी नगालैंड की तस्वीर
- नामः धनसिरी-जुज्बा लाइन
- कुल लंबाईः करीब 82.50 किलोमीटर
- कुल स्टेशनः 8
- सुरंगः 37
- पुलः प्रमुख पुल 24, छोटे पुल 156
- समयः 2025, (30 किलोमीटर को छोड़ कर)
नगालैंड का दिमापुर शहर पहले ही रेलवे नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। राजधानी कोहिमा अभी तक रेलवे नेटवर्क से जुड़ा नहीं है। अब रेलवे धनसिरी-ज़ुब्ज़ा लाइन, दीमापुर और कोहिमा शहरों के बीच बन एकल-ट्रैक बिछा रही है। यह जुज्बा (कोहिमा) रेलवे स्टेशन तक जाएगी। इसमें धनसिरी, धनसिरीपर, शोखुवी, मोल्वोम, फेरिमा, पिफेमा, मेंगुज़ुमा और जुब्जा रेलवे स्टेशन होंगे। इसमें 37 सुरंगें, प्रमुख पुल 24, छोटे पुल 156 होंगे। 5 रोड ओवर ब्रिज और 15 रोड अंडर ब्रिज होंगे। नगालैंड का फेरिमा मार्च 2025 तक जबकि जुज्बा (कोहिमा) करीब 30 किलोमीटर 2029 तक राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।
रेलवे नेटवर्क से जुड़गा अरुणाचल प्रदेश का पासीघाट
- नामः मुरगकोंगसेलेक-पासीघाट
- कुल लंबाईः करीब 26.15 किलोमीटर
- कुल स्टेशनः 4
- पुलः बड़े पुल 24, छोटे पुल 44
- समयः मई, 2025
असम के धेमाजी जिले (मुरकोंगसेलेक) से अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट (पूर्वी सियांग) जिले को जोड़ने के लिए मुरकोंगसेलेक-पासीघाट लाइन बिछाई जा रही है। इसकी 26.15 किलोमीटर है। इस पर कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें कुल चार स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें बड़े पुल 24, छोटे पुल 44 हैं। इसका काम मई, 2025 पूरा होने का अनुमान है। रेलवे मंत्रालय ने घोषणा की है कि रेलवे कार्य की समाप्ति के बाद पासीघाट स्टेशन से एक इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की योजना है।