एग्जिट पोल का दावा 'आएगा तो मोदी ही', भविष्य में देश की 10 सियासी तस्वीरों की ओर कर रहे इशारा
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2019 लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न हो गया और अब नतीजों का इंतजार है, जोकि 23 मई को आएंगे। रविवार को सातवें चरण का मतदान संपन्न होते ही विभिन्न चैनल और एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी किए, जिसमें भाजपा को बहुमत और एनडीए की सरकार गठन के स्पष्ट संकेत हैं। एक तरह से देखा जाए तो भाजपा के नारे 'आएगा तो मोदी ही' पर तमाम एग्जिट पोल्स ने भी अपनी मुहर लगा दी है। विपक्ष ने भी इस बार खूब जोर आजमाइश की है और इसी आधार पर भाजपा को बहुमत वाले एग्जिट पोल्स पर या तो ऐतराज जताया है या फिर नकारने की कोशिश की है।
विपक्ष के अंतिम दम तक जोर लगाने के बावजूद एनडीए की सरकार बनाने वाले इन एग्जिट पोल्स में कई सियासी संदेश छिपे हैं। आइए, 10 प्रमुख सियासी संकेतों पर नजर डालते हैं:
इस चुनाव में मोदी सरकार के पास बहुत से मुद्दे थे। भाजपा के पास केंद्र सरकार के पिछले पांच सालों में किए गए विकास कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त थी। बावजूद इसके चुनावी रैलियों में सबसे ज्यादा 'राष्ट्रवाद' का मुद्दा हावी रहा। पुलवामा के बाद पाकिस्तान में किए गए एयर स्ट्राइक के बाद लोगों में मोदी सरकार के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।
एक बार फिर मोदी लहर का असर
एग्जिट पोल ने जिस तरह एक बार फिर एनडीए को बहुमत दिखाया है, स्पष्ट होता है कि एक बार फिर पीएम मोदी के नाम की लहर का असर देखा गया है। नरेन्द्र मोदी देश में एक मजबूत नेता बनकर उभरे हैं और उनके सामने विपक्ष में राहुल या अन्य कोई नेता टक्कर में नहीं खड़ा हो पाया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगले पांच साल तक मोदी के नाम का दबदबा बना रहेगा।
हिंदी पट्टी के साथ बंगाल और ओडिशा में भी दबदबा
एग्जिट पोल के बाद पश्चिम बंगाल ओर ओडिशा में भी भाजपा अपनी जगह बनाती दिख रही है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं हिंदी पट्टी में तो भाजपा ने विरोधियों को पछाड़ा ही है, बल्कि बंगाल और ओडिशा में भी इसने बेहतर प्रदर्शन किया है। अब 23 मई को फाइनल रिजल्ट आएगा तो यह पता चलेगा कि भाजपा अपने उद्देश्य में कितनी कामयाब हुई है।
राहुल-प्रियंका की जोड़ी का नहीं चला जादू, नेतृत्व पर सवाल
कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी के तौर पर बड़ा दांव खेला। राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने के बाद जिस तरह से पिछले साल तीन राज्यों में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाई, उसी तरह प्रियंका के सक्रिय राजनीति में पदार्पण से भी बड़ी उम्मीद जताई जा रही थी। देश भर में तस्वीर साफ है, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार उत्तर प्रदेश में भी जिस तरह कांग्रेस जूझती नजर आ रही है, यह राहुल और प्रियंका के भी नेतृत्व पर सवाल है। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस और कमजोर हो जाएगी?
महागठबंधन की कोशिश में लगा विपक्ष और बिखरेगा
चुनाव से पहले से ही विपक्ष महागठबंधन की कोशिश में लगा रहा, लेकिन सातों चरण के चुनाव खत्म होने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई। यूपी में सपा-बसपा, कांग्रेस से अलग रही तो बंगाल में ममता। आने वाले वक्त में यह भी हो सकता है कि विपक्ष और बिखरे। कर्नाटक में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बीच सेंधमारी की फिराक में है। वहीं, ओडिशा में बीजद प्रमुख पटनायक और तेलंगाना के केसीआर भी एनडीए के साथ जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का क्या होगा
उत्तर प्रदेश में अखिलेश की पहल पर मुलायम सिंह और मायावती ने पुरानी दुश्मनी खत्म करते हुए गठबंधन किया। एग्जिट पोल में अधिकतर एजेंसियों ने इसे बड़ी कामयाबी नहीं दिखाई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन टूटेगा या रहेगा। पिछले विधानसभा चुनाव में बनी अखिलेश-राहुल की जय-वीरू वाली जोड़ी, रिजल्ट के बाद टूट गई थी। ऐसे में नतीजे, एग्जिट पोल की तरह रहे तो क्या सपा-बसपा गठबंधन का भी यही हश्र होगा?
और मजबूत होगी अमित शाह की धाक
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अगुआई में यह पहला आम चुनाव है और एग्जिट पोल की तरह नतीजे आने पर यह उनकी बड़ी कामयाबी होगी। वह पहली बार लोकसभा चुनाव भी लड़े हैं। अमित शाह ने 'पन्ना प्रमुखों' के जरिए अप्रत्याशित कमाल किया था। 'अबकी बार 300 पार' के नारे के करीब भी भाजपा पहुंच पाई तो इसका बड़ा क्रेडिट अमित शाह को जाएगा। उनकी धाक आने वाले समय में और मजबूत होगी।
रिजल्ट आते ही बढ़ेंगे एनडीए के सहयोगी
एनडीए की सरकार बनने के बाद अगर भाजपा मजबूती से सरकार में आई तो एनडीए के सहयोगी दलों में बढ़ोतरी होगी। तेलंगाना में सीएम के चंद्रशेखर राव हों, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस चीफ जगन मोहन रेड्डी हों या फिर ओडिशा से बीजद प्रमुख नवीन पटनायक, ये सभी एनडीए के साथ आ सकते हैं। इन नेताओं का उद्देश्य अपने क्षेत्र में अपनी धाक बनाए रखना है, इसके लिए उन्हें जो जरुरी लगेगा, करने को तैयार रहेंगे।
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार तो है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी के समर्थन से है। उसी तरह मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं है, यहां भी समर्थन से ही सरकार बनी है। पिछले दिनों टकराव की स्थिति में बसपा ने समर्थन वापस लेने की चेतावनी भी दी थी। एग्जिट पोल वाली रात मायावती की दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की खबरें आई, लेकिन अगली सुबह बसपा ने खबर का खंडन कर दिया। ऐसे में एक संकेत ऐसे भी मिल रहे हैं कि राज्यों में कांग्रेस की सरकारों पर संकट आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
2024 के लिए तैयारी शुरू कर दे विपक्ष
भाजपा अपने हिंदी पट्टी वाले पारंपरिक राज्यों में हो रहे नुकसान की भरपाई बंगाल और उड़ीसा जैसे राज्यों में कर लेगी। यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं और 2014 की तरह ही एनडीए सत्ता में लौटती है, तो ये चुनाव क्षेत्रीय दलों को उनके अंत की ओर धकेल देगा। वहीं, कांग्रेस और टीएमसी जैसे विपक्षी दलों के लिए यह बड़ा झटका होगा। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्ष अब 2024 के लिए तैयारी शुरू कर दे।