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राकेश टिकैत ने पुलिस की 'चेतावनी' को ठेंगा दिखा सड़क पर खाया खाना, भारी जनसमर्थन के बाद फिर खड़ा हुआ किसान आंदोलन

Wed, 03 Feb 2021 07:03 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 03 Feb 2021 07:03 AM IST
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Kisan Andolan: Agitation won't end soon, says Rakesh Tikait, as he eats his lunch on road despite of police barriers
गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड्स के नीचे सड़क पर खाना खाते राकेश टिकैत - फोटो : PTI

किसानों का मसीहा कहे जाने वाले महेंद्र सिंह टिकैत की विरासत उनके दोनों बेटे नरेश टिकैत और राकेश टिकैत संभाल रहे हैं। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पर मोर्चा संभाले हैं, तो वहीं नरेश टिकैत पश्चिमी यूपी में महापंचायतें कर किसानों को एकजुट कर रहे हैं। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद जहां टिकैत बंधु बैकफुट पर नजर आ रहे थे, वहीं एक हफ्ते बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। किसान आंदोलन नए रंग के साथ जोर पकड़ रहा है। भारी जनसमर्थन मिलने के बाद राकेश टिकैत एक बार फिर मजबूती के साथ उभरे हैं और इसका उदाहरण मंगलवार को गाजीपुर बॉर्डर पर देखने को मिला।

Kisan Andolan: Agitation won't end soon, says Rakesh Tikait, as he eats his lunch on road despite of police barriers
राकेश टिकैत के साथ शिवसेना नेता संजय राउत - फोटो : PTI

किसान आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर भारी सुरक्षा-व्यवस्था की है और धारा 144 लगा रखी है। मंगलवार को इन्हीं बैरिकेड्स के नीचे सड़क पर बैठकर राकेश टिकैत ने खाना खाया। उनके समर्थकों में से एक ने कहा भी कि ऊपर पुलिस की चेतावनी लिखी है तो उन्होंने कहा इसीलिए तो यहीं बैठकर खा रहा हूं। सोशल मीडिया पर उनके इस अंदाज की काफी चर्चा हो रही है। लोग उनके इस अंदाज की तुलना उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत के अक्खड़ मिजाज से कर रहे हैं।

Kisan Andolan: Agitation won't end soon, says Rakesh Tikait, as he eats his lunch on road despite of police barriers
महेंद्र सिंह टिकैत (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

राकेश टिकैत के अंदाज को देखकर बाबा टिकैत (पिता महेंद्र सिंह टिकैत) से उनकी तुलना यूं ही नहीं हो रही। महेंद्र सिंह टिकैत का व्यक्तित्व इससे कहीं ज्यादा बड़ा था। महेंद्र सिंह टिकैत ने ही किसानों को अपने हक के लिए लड़ना सिखाया। उनके एक इशारे पर लाखों किसान जमा हो जाते थे। कहा जाता है कि किसानों की मांगें पूरी कराने के लिए वह सरकारों के पास नहीं जाते थे, बल्कि उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावी था कि सरकारें उनके दरवाजे पर आती थीं।

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Kisan Andolan: Agitation won't end soon, says Rakesh Tikait, as he eats his lunch on road despite of police barriers
किसान आंदोलन - फोटो : PTI

महेंद्र सिंह टिकैत के व्यक्तित्व का अंदाजा लगाने के लिए साल 1988 के किसान आंदोलन का उदाहरण काफी है। महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में पूरे देश से करीब पांच लाख किसानों ने विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक कब्जा कर लिया था। अपनी मांगों को लेकर इस किसान पंचायत में करीब 14 राज्यों के किसान आए थे। सात दिनों तक चले इस किसान आंदोलन का इतना व्यापक प्रभाव रहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार दबाव में आ गई थी। आखिरकार तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को किसानों की सभी 35 मांगें माननी पड़ीं थीं, तब जाकर किसानों ने अपना धरना खत्म किया था।

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