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बुलेट ट्रेन से पहले बढ़ जाएगी भारतीय रेल की स्पीड, दोगुनी हॉर्सपॉवर से दौड़ने को हो रही तैयार

Wed, 21 Mar 2018 10:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा Updated Wed, 21 Mar 2018 10:06 PM IST
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Indian train speed will increase before bullet train, ready to run with double horsepower

भारतीय रेलवे बुलेट तकनीक विकसित करने से पहले कई तरह से इसमें सक्षम होने की तैयारी कर रही है। यही कारण है कि भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा जारी की गई इस तस्वीर में, एक रेल लोकोमोटिव संयंत्र दिखाया गया है जहां बिहार के मधेपुरा में भारत का पहला 12,000 हॉर्सपॉवर इलेक्ट्रिक इंजन का उत्पादन किया जा रहा है। बता दें कि यह औसतन भारतीय रेल इंजन की ताकत को दोगुना करने का प्रयास है। प्रोटोटाइप लोकोमोटिव के लिए पिछले साल मई में इस योजना के अंतर्गत काम शुरू किया गया था और जुलाई 2018 तक इसके जारी रहने की उम्मीद है। यानी जुलाई तक सरकार जरूरत जितने इलेक्ट्रॉनिक इंजन बना लेगी जिससे भारतीय रेल को और तेजी में लाया जा सके। 

भारतीय रेलवे की ताकत होगी दोगुनी

Indian train speed will increase before bullet train, ready to run with double horsepower

आधुनिक लोकोमोटिव में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत वाहन की लागत का 50% तक हो सकता है। भारत में आम तौर पर WAG-9 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी क्षमता मैक्सिमम 6000 हॉर्सपॉवर की है। तो मधेपुरा में तैयार होने वाला नया इलेक्ट्रिक इंजन भारतीय रेलवे की क्षमता को तेजी से पंख लगाने का है।

कैसे बढ़ेगी रफ्तार?

Indian train speed will increase before bullet train, ready to run with double horsepower

विशेष रूप से भारत की कुछ सबसे तेज रेलगाड़ियां, गतिमान एक्सप्रेस और भोपाल शताब्दी ट्रेनों को WAP-5 इंजनों द्वारा खींचा जाता है और ये नई दिल्ली-आगरा में 160 किलोमीटर प्रति घंटे (99 मील प्रति घंटा) और 150 किमी/घंटा (93 मील प्रति घंटा) पर दौड़ती है। वहीं सबसे बड़े (लंबाई के अनुसार) स्टीम लोकोमोटिव इंजन हैं। 1941 से 1945 के मध्य में बने इन इंजनों को 'बिग बॉयज़' के नाम से जाना जाता है। 

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कहां से मिला फायदा?

Indian train speed will increase before bullet train, ready to run with double horsepower

याद दिला दें कि भारतीय रेलवे को अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से पहला डीजल-इलेक्ट्रिक रेल इंजन पहले ही प्राप्त हो चुका है। यह इस तरह के एक हजार इंजनों की 2.5 अरब डॉलर में आपूर्ति करने के सौदे के तहत प्राप्त हुआ है। यह परियोजना भारतीय रेलवे और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच संयुक्त उपक्रम है जिसका उद्देश्य 4500 हॉर्सपावर और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक इंजनों की आपूर्ति एवं रख-रखाव करना है। इस संयुक्त उपक्रम की घोषणा नवंबर 2015 में की गयी थी।

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और क्या होने की उम्मीद?

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इससे डीजल इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन सिस्टम में डीजल इंजन और इलेक्ट्रिक जेनरेटर कनेक्ट किया जा सकता है। उच्च क्षमता के इंजन में इलेक्ट्रिक इंजन को रिचार्जेबल बैटरी में स्टोर किया जा सकता है। भारत में रेलवे नेटवर्क को तेजी से इलेक्ट्रीफिकेशन की ओर ले जाया जा रहा है। मतलब ये है कि आगे आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा और डीजल इंजन को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

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