Draupadi Murmu-Margaret Alwa: ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक दिल्ली में निर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आवास पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिनंदन करने और उन्हें शुभकामनाएं देने आया हूं। मैं बहुत खुश और सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि ओडिशा की एक बेटी को भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया है, मैं कल उनके शपथ ग्रहण समारोह के लिए वहां मौजूद रहूंगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बन रही है। ओडिशा के लोग उत्साहित हैं। आदिवासियों को अपने समुदाय के उत्थान के लिए बहुत उम्मीदें हैं।
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मार्गरेट अल्वा
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अल्वा ने की सीएम योगी से बात
इस बीच कांग्रेस उप राष्ट्रपति चुनाव पर NCP कार्यालय में विपक्ष की बैठक आयोजित करेगी। इसे लेकर विपक्षी की उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा NCP कार्यालय पहुंचीं। वहीं, उप राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर विपक्षी की उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने कहा कि मैंने सभी राज्यों के CM से बात की है। मैंने सबसे बात की है, यहां तक की मैंने योगी आदित्यनाथ तक से बात की है, वे लोकसभा के समय से मेरे मित्र हैं। मैं आगे भी सबसे बात करूंगी।
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हिमंता बिस्वा सरमा
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सरमा ने कहा- उपराष्ट्रपति के चुनाव में मेरी कोई भूमिका नहीं
वहीं, अल्वा ने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा से भी बात की। इसके बाद सरमा ने ट्वीट कर बताया कि विपक्ष की उपाध्यक्ष उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने आज सुबह मुझसे बात की। मैंने विनम्रता से उनसे कहा कि मैं इलेक्टोरल कॉलेज का सदस्य नहीं हूं। ऐसे में भारत के उपराष्ट्रपति के चुनाव में मेरी कोई भूमिका नहीं है।
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि विपक्ष की उपराष्ट्रपति उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने आज से अपने अभियान की शुरूआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि असम, कर्नाटक और दिल्ली के मुख्यमंत्री से बात की।

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मार्गरेट अल्वा
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कभी भी बदल सकता वोटों का गणित: अल्वा
उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की संयुक्त प्रत्याशी मार्गरेट अल्वा ने कहा कि वह चुनाव परिणाम को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं क्योंकि वोटों का गठित कभी भी बदल सकता है। चुनाव में सत्तारूढ़ राजग का पलड़ा भारी होने पर उन्होंने कहा कि हम यह कहकर पीछे नहीं हट सकते हैं कि हमारे पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसलिए हम चुनाव नहीं लड़ेंगे। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव से दूर रहने पर उन्होंने कहा कि वह इससे स्तब्ध हैं। ममता बनर्जी विपक्ष को एकजुट करने के अभियान का नेतृत्व करती रही हैं। वह पिछले कई वर्षों से दोस्त हैं। उनके पास अपना फैसला बदलने के लिए पर्याप्त वक्त है।