गर्मियों में चुनावी सरगर्मी फिर चरम पर होगी। अप्रैल में 5 राज्यों में चुनाव होना है, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल महत्वपूर्ण हैं। केंद्र की राजनीति में काबिज भाजपा की निगाह इन राज्यों पर हैं। आइए जानते हैं किस राज्य में भाजपा की क्या हैसियत है और कौन हैं इन राज्यों में बड़े खिलाड़ी।
स्टिंग के बाद बैकफुट पर हैं ममता
'पोरिबर्तन' की लहर पर सवार ममता बनर्जी ने पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय राजनीति की सबसे करिश्माई जीत हासिल की थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 'अपराजेय' मान लिए गए वाम मोर्च को उखाड़ फेंका। हालांकि इस बार चुनाव के ऐन पहले आए स्टिंग से वो बैकफुट पर हैं। पार्टी के कई आला नेता कैमरे पर पैसे लेते पकडे़ गए हैं। आगामी चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन चुनाव है।
सीपीएम की कमान सूर्यकांत के हाथों में
34 साल तक पश्चिम बंगाल में शासन कर चुकी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की कमान सूर्यकांत मिश्रा के हाथों में है। बुद्घदेव भट्टाचार्य और बिमान बोस के नेतृत्व में पिछला चुनाव लड़ चुकी सीपीएम ने पिछले वर्ष ही उन्हें राज्य इकाई का सचिव नियुक्त किया था। मिश्रा 2011 से विधानसभा में नेता विपक्ष हैं और उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जा रहा है। पेशे से डॉक्टर मिश्रा को 2011 सीपीएम की पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया था।
बीजेपी की सेंधमारी से परेशान गोगोई
तरूण गोगोई 79 वर्ष के हो चुके हैं, हालांकि असम में बीजेपी की सेंधमारी से परेशान कांग्रेस उन्हें ही अपना खेवनहार मानती है। वे लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनावों उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था, जबकि राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस केवल 3 ही जीत पाई थी। 2009 के चुनावों में कांग्रेस ने असम में 9 लोकसभा सीटें जीती थीं।
'दलबदलू' सोनोवाल के भरोसे भाजपा
सर्बानंद सोनावाल 'दलबदलू' हैं, हालांकि मोदी के चेहरे पर दिल्ली और बिहार में मुंह की खा चुकी भाजपा ने उन्हें असम में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया है। 2011 में वे असम गण परिषद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने राज्य में भाजपा को 7 सीटें दिलाई थीं, जिसके बाद केंद्र में उन्हें बतौर पुरस्कार मंत्री पद दिया गया। पार्टी ने उन्हें इसी जनवरी में मंत्री पद से हटाकर असम में चुनावी तैयारियों के लिए भेज दिया। वे राज्य में पार्टी के अध्यक्ष भी हैं।