खूबसूरत बालों की चाह हर महिला को होती है। इन दिनों बाजार में बालों के कई ब्यूटी ट्रीटमेंट जैसे रीबॉन्डिंग, स्मूदनिंग, स्ट्रेटनिंग और केराटीन डिमांड में हैं। बहुत सारी महिलाएं इन्हें लेकर कंफ्यूज रहती हैं। आइए जानते हैं केराटीन और स्ट्रेटनिंग में क्या अंतर है...
ब्यूटीशियन शिखा पटेल बताती हैं, कई महिलाओं को लगता है कि केराटीन ट्रीटमेंट और स्ट्रेटनिंग एक ही बात है। उन्हें लगता है केराटीन ट्रीटमेंट लेने से उनके बाल बिल्कुल स्ट्रेट हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। केराटीन ट्रीटमेंट और स्ट्रेटनिंग में बहुत अंतर होता है।
क्या होता है केराटीन ट्रीटमेंट
केराटिन एक केमिकल ट्रीटमेंट है। यह आपके बालों की खोई चमक और फ्रीजनेस को दूर करने में मदद करता है। एक्सपर्टस का मानना है कि जिस तरह उम्र के साथ महिलाओं की त्वचा पर असर पड़ता है वैसे ही बालों पर भी इसका फर्क पड़ता है। यह बालों को सिल्की लुक देने के साथ-साथ बालों को स्ट्रांग बनाता है। अगर आपके बाल बहुत गिरते है और फ्रीजी हो गये हैं तो यह आपके लिए बेस्ट आप्शन है।
इस ट्रीटमेंट में आपके बालों पर प्रोटीन की एक परत चढ़ाई जाती है, जिसे प्रेसिंग की मदद से आपके बालों में प्रोटिन लेयर को लॉक किया जाता है। इस ट्रीटमेंट से आपके बाल शाइनी होने के साथ-साथ पहले से थोड़े स्ट्रेट हो जाते हैं, लेकिन अगर आप यह सोच रही हैं कि आपके बाल बिल्कुल रीबॉन्डिंग या स्मूदनिंग की तरह स्ट्रेट हो जाएंगे तो आप गलत हैं।
केराटिन, रीबॉन्डिंग और स्मूदनिंग से बिल्कुल अलग है। कैराटिन बालों की फ्रीजनेस को दूर कर उन्हें रिपेयर करने का काम करता है वहीं रीबॉन्डिंग और स्मूदनिंग में बालों को स्ट्रेट किया जाता है। केराटिन में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स माइल्ड होते हैं जबकि रीबॉन्डिंग और स्मूदनिंग में इस्तेमाल होने वाले कैमिक्लस हार्ड होते हैं।