60 और 70 के दशक में एक्ट्रेस साधना हिंदी सिनेमा का एक जाना पहचाना नाम थीं। साधना को 'मेरा साया', 'आरजू', 'एक फूल दो माली', 'लव इन शिमला', 'वक्त' और 'वो कौन थी' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। उस दौर में साधना का हेयर स्टाइल इतना फेमस हुआ था कि उसका नाम ही 'साधना कट' पड़ गया था। 2 सितंबर 1941 को जन्मीं साधना के बारे में जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से।
साधना का जन्म पाकिस्तान के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। वो अपने मां-बाप की इकलौती संतान थीं। बंटवारे के बाद उनका परिवार कराची छोड़कर मुंबई आ बसा। साधना के पिता को एक्ट्रेस साधना बोस पसंंद थीं इसलिए अपनी बेटी का नाम भी उन्होंने साधना ही रखा। उन्होंने 8 साल तक अपनी पढ़ाई घर पर ही की थी। कम ही लोगों को पता है कि साधना का कपूर खानदान से रिश्ता था। साधना के पिता और एक्ट्रेस बबिता केे पिता हरि शिवदासानी सगे भाई थे। इस तरह देखें तो साधना, बबिता की बेटियों करीना और करिश्मा की आंटी थीं।
साधना ने महज 14 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। राज कपूर की फिल्म 'श्री 420' में एक गाना मुड़-मुड़ के न देख के कोरस में साधना थीं। इसके बाद उन्होंने 16 साल की उम्र में सिंधी फिल्म 'अबाना' में लीड रोल में काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हें केवल एक रुपये का टोकन अमाउंट मिला था। इस फिल्म के बाद एक मैग्जीन में साधना की तस्वीर छपी। तब के मशहूर प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी ने वो तस्वीर देखी और साधना को पहला मौका अपनी फिल्म 'लव इन शिमला' में दिया।
फिल्म के डायेक्टर आरके नैय्यर को साधना का चेहरा थोड़ा अजीब लग रहा था। नैय्यर को साधना का माथा बहुत बड़ा लगा। उन्होंने हॉलीवुड एक्ट्रेस ऑडी हेपबर्न की तरह साधना का हेयर स्टाइल करवा दिया और माथा छुपाने के लिए आगे के बालों को माथे पर बिखेर दिया। बाद में साधना की यही हेयरस्टाइल उनकी पहचान बन गई। साधना ने अपनी ज्यादातर फिल्मों के डायरेक्टर आरके नैय्यर से प्यार हो जाने के बाद मार्च 1966 में शादी कर ली।
साधना के माता-पिता इस शादी के खिलाफ थे क्योंकि नैय्यर उनसे उम्र में काफी बड़े थे। दोनों के कोई संतान नहीं थीं। शादी के बाद साधना ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया था। वो बड़ी उम्र के किरदार परदे पर नहीं निभाना चाहती थीं। साधना चाहती थीं कि लोग हमेशा उनकी खूबसूरती को याद रखें।