भोजपुरी फिल्मों में गायिकी से लेकर अभिनय और राजनीति तक पहुंचकर अपने पैर जमाने में मनोज तिवारी ने कई उतार चढ़ाव देखे। एक फरवरी को मनोज तिवारी का जन्मदिन है ऐसे में आपको हम बताते हैं उनके संघर्ष के दिनों की कुछ ऐसी कहानियां जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे।
उन्होंने साल 2004 में 'ससुरा बड़ा पईसावाला' से भोजपुरी फिल्मों में डेब्यू किया था। मनोज की पहली ही फिल्म सुपरहिट रही और उन्हें घर-घर में पहचान मिल गई। 30 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 9 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
जो लोग थोड़ी बहुत भी भोजपुरी समझते हैं, उनकी जुबान पर मनोज के गाए हुए 'रिंकिया के पापा...', 'जिया हो बिहार के लाला...', 'गोरिया चांद के अंजोरिया...' और 'हाफ पैंट वाली से...' जैसे गाने रहते हैं। मनोज अपने गानों के जरिए चर्चा में रहते हैं।
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Manoj Tiwari
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अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए मनोज कहते हैं कि चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना, प्लेटफॉर्म पर सोना सब याद आता है। मुझे लोगों ने बहुत प्यार दिया। मुझे नहीं पता था कि चलते-चलते मुझे नरेंद्र मोदी जी मिल जाएंगे।
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मनोज तिवारी
- फोटो : amar ujala
गायन और अभिनय में जड़ें जमा लेने के बाद मनोज तिवारी राजनीति में भी उतरे। साल 2009 में उन्होंने सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा। चुनाव में वो वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गोरखपुर से लड़े और हार गए थे। साल 2013 में मनोज भाजपा में शामिल हो गए थे।