हॉरर फिल्मों के मामले में भारत में कम ही ऐसी फिल्में बनी हैं जो दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो। बॉलीवुड में अब भले ही कुछ अच्छी हॉरर फिल्में बन रही हों लेकिन 90 के दशक की डरावनी फिल्में डराती कम हंसाती ज्यादा थीं। आइए आपको बताते हैं उन हॉरर फिल्मों के बारे में...
ये हैं पुराने जमाने की हॉरर फिल्में, अब देख लेंगे तो हंसते-हंसते पेट में हो जाएगा दर्द
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बंद दरवाजा
यह फिल्म साल 1990 में आई थी। इस फिल्म का शैतानी हॉरर कई दर्शकों को डरा चुका है। इस फिल्म में मनजीत कॉल, अरुणा ईरानी और चेतन दास मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में ड्रैकुला जो दिन में अपनी नींद बंद ताबूत में पूरा करता है, और रात में खूनी चमगादड़ बन डराता। इस फिल्म का ड्रैकुला जिस तरह की हरकतें करता है उन्हें देखकर तो आज के समय में लोग डरेंगे कम हंसेंगे ज्यादा।
वीराना
यह फिल्म साल 1988 में आई थी। फिल्म वीराना ने सिनेमाघरों में हॉरर से काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस फिल्म में जैसमीन, साहिल चड्ढा और साहिल ब्रिजे जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में भूत का किरदार निभाने वाली जैस्मिन की खूबसूरती देख उसके दीवाने हो जाते थे और वो उन्हें मार डालती थी। वीराना में एक डायन मरने के बाद फिर से बदला लेने लौटती है। लोगों का उसकी असलियत जानकर चिल्लाना काफी फनी लगता है।
पुराना मंदिर
फिल्म की कहानी कुछ ऐसी थी कि 200 साल पहले एक राजा को कपटी तांत्रिक श्राप देता है कि उनके परिवार में हर लड़की बच्चे को जन्म देते वक्त ही मर जाएगी। वहीं एक वक्त ऐसा आएगा जब वो भूत बनकर जिंदा हो जाएगा और हर किसी को खत्म कर देगा। उन दिनों इन हॉरर फिल्मों के पोस्टर भी काफी लोकप्रिय हुआ करते थे। सामरी के किरदार से सबसे बड़ा असर अनिरुद्ध अग्रवाल ने छोड़ा। यह रामसे बंधुओं की सबसे बड़ी हिट फिल्म 'पुराना मंदिर' का विलेन था, जो शैतान की पूजा करता था और इंसानों को खाता था। ये फिल्म हॉरर कम कॉमेडी ज़्यादा लग रही थी। इसमें लीड एक्टर्स या तो प्यार कर रहे होते या राक्षस से लड़ रहे होते थे।
प्यासी आत्मा
इस फिल्म में एक लड़की का खून कुछ दोस्त मिलकर कर देते हैं। अब उसकी आत्मा भटक रही है और अपने ख़ूनियों से बदला लेने आई है लेकिन न तो इसमें आत्मा और न ही तांत्रिक डरावने लगते हैं. इसके उलट उन्हें देख हंसी जरूर आती है। फिल्म का पोस्टर देखकर तो और ज्यादा हंसी आती है।