संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। इसे दर्शकों की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। यह एक पीरियड ड्रामा सीरीज है, जिसमें कई कलाकारों ने काम किया है। भंसाली की हर एक फिल्म चर्चा में रहती हैं। 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' से उन्होंने वेब सीरीज में डेब्यू किया है। अब हाल ही में, अभिनेता शेखर सुमन ने 'तवायफों' और यौनकर्मियों के बीच अंतर समझाया है।
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शेखर सुमन
- फोटो : इंस्टाग्राम
एक साक्षात्कार में, शेखर सुमन ने कहा कि वेश्याओं को अक्सर "गलत नजरिए" से देखा जाता है और उन्हें गलत तरीके से यौनकर्मी करार दिया जाता है। अभिनेता ने दोनों वर्गों को अलग नजरिया देने का आग्रह किया है।
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शेखर सुमन, अध्ययन सुमन
- फोटो : इंस्टाग्राम
शेखर ने कहा, “यह समाज ही है, जिसने उन्हें इस तरह बनाया है। शो में कई बार यह बताया गया है कि कोई भी महिला अपनी मर्जी से वेश्या नहीं बनती। हालात अक्सर महिला को यौनकर्मी बनने पर मजबूर कर देते हैं। इन सबके बावजूद, समाज में उनका योगदान बहुत बड़ा है... जहां से हम आते हैं, जिस तरह की भूख जो मर्दों में है, उसका जो चैनल होता है, उसकी वजह से समाज बचा रहता है। अपनी यौन भूख को यौनकर्मियों के माध्यम से मिटाते हैं।
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शेखर सुमन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
शेखर सुमन ने आगे कहा कि पुराने दिनों में, लोगों को हीरामंडी भेजा जाता था, जो एक 'फिनिशिंग स्कूल' की तरह था। इसमें लोग "प्राचीन वस्तुएं, शिष्टाचार, प्रेम-प्रसंग की कला, कविता, संगीत और नृत्य" सीखते थे। हीरामंडी का योगदान बहुत बड़ा था, यह एक संस्था थी, लेकिन हमने हमेशा तवायफों को हमेशा वेश्या की तरह देखा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
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हीरामंडी
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि इस सीरीज में सोनाक्षी सिन्हा, मनीषा कोइराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, शर्मिन सहगल, अदिति राव हैदरी, ताहा शाह बदुशाह, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन जैसे कई सितारे अहम भूमिका में नजर आए हैं।
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