OYO Rooms के संस्थापक 23 वर्षीय रितेश अग्रवाल अब भारत के साथ साथ चीन में भी अपने कदम जमाने जा रहे हैं। 6.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश फंड के मालिक मासायोशी सन ने चीन में कारोबार शुरू करने में अग्रवाल की मदद मांगी है।
कभी छोटे शहर में सिम कार्ड बेचता था ये शख्स, 4 साल में खड़ा कर दिया 5800 करोड़ का एम्पायर
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रितेश अग्रवाल अपने आप में सफलता का एक ऐसा उदाहरण हैं जो यह साबित करता है कि सफल होने के लिए शिक्षा ही सबकुछ नहीं होती। आपको बता दें कि कुछ वर्ष पहले तक रितेश ओडिशा के एक छोटे से शहर में सिम कार्ड बेचते थे लेकिन आज दुनियाभार के सफल लोगों में उनका नाम शुमार है। सबसे बड़ी बात ये है कि दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल सॉफ्टबैंक के मासायोशी सन चीन में ओयो रूम्स की एंट्री के साथ इसका पार्टनर बनना चाहते हैं।
रितेश अग्रवाल ने स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद ही छोटे मोटे काम करने शुरू कर दिए थे। मात्र 22 साल की उम्र में ही वह करोड़ों डॉलर के मालिक बन गए। वही मासायोशी सन ने उनकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा- 'मैं आप लोगों को इस कंपनी के बारे में बताने को लेकर काफी उत्साहित हूं। इसके संस्थापक अभी मात्र 23 साल के हैं। उन्होंने मात्र 19 साल की उम्र में कंपनी की स्थापना की। मात्र चार साल बीते हैं और यह कंपनी बहुत तेजी से बढ़ रही है।'
रितेश अग्रवाल दक्षिणी ओडिशा के एक छोटे से कस्बे विषम कटक के रहने वाले हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता है। वह टीवी के रिमोट पर अपना कंट्रोल रखने की इच्छा की वजह से ओयो रूम्स की शुरुआत करने के लिए प्रेरित हुए थे। यह तब संभव नहीं था, जब वह बच्चे थे और रिश्तेदारों के साथ रहते थे। साल 2015 में एक इंटरव्यू में रितेश ने बताया था कि ओयो का पूरा नाम "ऑन योर ऑन" है। ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि रिश्तेदारों के घर टीवी के रिमोट पर मेरा कंट्रोल नहीं होता था। इसी वजह से मैंने ओयो रूम्स की शुरुआत करने के बारे में सोचा। रिश्तेदार डेली सोप देखना चाहते थे और मैं कार्टून नेटवर्क देखना चाहता था।
रितेश अपनी कंपनी के एक मात्र स्कूल ड्रॉपआउट हैं, जो आईआईएम के 10-12 लोगों और आईआईटी, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के करीब 200 लोगों की टीम को लीड कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में यह मजाक है, मैं स्मार्ट और हाईक्वालिटी वाले किसी भी ड्रॉपआउट में नहीं आया हूं। उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में हमारे पास हाई-क्वालिटी वाले ड्रॉपआउट होंगे। मैं जब बातचीत के लिए कॉलेज में जाता हूं, तो छात्रों को ड्रॉप आउट के लिए प्रोत्साहित करता हूं।'
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