सरित शर्मा और संध्या गुप्ता, दोनों इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी हैं। अमेरिका में दोनों अपनी पांच साल की बेटी के साथ ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे। लेकिन जीवन में कुछ अर्थपूर्ण करने की जिद उन्हें अमेरिका से हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव में ले आई। अब यह दोनों मिलकर पहाड़ों पर बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।
पालमपुर के नजदीक कंदबरी में रह रहे सरित और संध्या अपनी 9 से 5 की जिंदगी से उब चुके थे। एक दिन दोनों ने अपनी नौकरी छोड़ कर भारत में बसने का फैसला लिया। अमेरिका से कंदबरी आने के बाद दोनों ने अपनी पांच साल की बेटी का एक लोकल सरकारी स्कूल में दाखिला करवाया। लेकिन वहां के स्कूलों की बदतर हालत देखकर दोनों को काफी दुख हुआ।
सरित और संध्या ने तब फैसला लिया कि वह स्कूलों को बेहतर बनाएंगे। दोनों ने वहां के स्कूलों में जाना शुरू किया और बच्चों के साथ समय व्यतीत किया। चार साल तक वहां के माहौल और स्कूलों के अध्ययन के बाद सरित और संध्या ने 'अविष्कार' नाम के एनजीओ की स्थापना की।
दोनों को लगता था कि मैथ्स और साइंस शिक्षा के लिहाज से काफी अहम विषय हैं और अधिकतर बच्चे इसी को पढ़ने से हिचकिचाते हैं। सरित और संध्या ने इन्हीं दोनों विषयों को सरल करने की सोची जिससे बच्चे इसको दिल लगाकर पढ़ सकें। इसलिए दोनों ने सोचा कि इसे रटने के बजाए क्यों ना मॉडल्स और प्रोजेक्ट के सहारे पढ़ाया जाए।
'आविष्कार' नाम का यह एनजीओ आसान और सरल तरीकों से बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है। एनजीओ से जुड़े एक टीचर कहते हैं, "हम बच्चों को मनोरंजक तरीकों से पढ़ाने में यकीन रखते हैं। अब बच्चे रटने की बजाय समझते हैं। कोई मॉडल देख लेने के बाद उन्हें समझने में आसानी होती है।"
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