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आखिर कौन हैं अवनि, जो बनीं देश की पहली महिला फाइटर पायलट
Fri, 23 Feb 2018 03:04 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 23 Feb 2018 03:04 PM IST
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अवनि चतुर्वेदी फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गई हैं। उन्होंने अकेले मिग-21 बाइसन विमान उड़ा कर यह कीर्तिमान स्थापित किया है। अवनि ने इसके लिए गुजरात के जामनगर एयरबेस से उड़ान भरी और पहली बार में इसे पूरा किया। इस तरह से अवनि फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गईं और इतिहास रच दिया।
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एक फाइटर पायलट युद्ध की स्थिति में अवनि सुखोई जैसे विमान भी उड़ा सकती हैं। साल 2016 में अवनि के साथ-साथ भावना कांत और मोहना सिंह को इस काम के लिए चुना गया था। बीते एक साल तक तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग दी गई। बता दें कि इसके पहले 2016 के पहले भारतीय वासुसेना में महिलाओं को फाइटर प्लेन चलाने की अनुमति नहीं थी। मगर अनुमति मिलने के दो साल बाद ही अवनि ने पहली महिला फाइटर प्लेन पायलट बनने का तमगा अपने नाम कर लिया।
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अवनि का बचपन मध्यप्रदेश में रीवा के पास एक छोटे से कस्बे में बीता। शुरूआती पढ़ाई अवनि ने हिंदी माध्यम में की है। अवनि के पिता दिनांकर चतुर्वेदी ने बीबीसी से कहा, "बचपन से अवनि बहुत शांत स्वभाव की थी। मगर उसे अनुशासन में रहना पसंद था। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे पायलट ही बनना है। अवनि ने 10वीं और 12वीं दोनों ही बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था। उसके बाद आगे की इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वो वनस्थली विद्यापीठ चली गईं।
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अवनि के पिता खुद भी पेशे से इंजीनियर हैं। उनकी मां हाउस वाइफ हैं। उनका एक बड़ा भाई है जो भारतीय सेना में है। दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई तक अवनि को नहीं मालूम था कि वो आगे चल कर पायलट बनना चाहती हैं। दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया, '2003 में कल्पना चावला की मौत के बाद जब अवनि ने उनके बारे में पढ़ा, तब पहली बार उसने मुझसे अंतरिक्ष में उड़ान भरने की इच्छा जाहिर की।'
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भाई के सेना में होने की वजह से उन्होंने एक सैनिक के जीवन को भी काफी करीब से देखा है। देशसेवा का जज़्बा उन्हें भाई से ही मिला। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अवनि ने एयरफोर्स की टेक्निकल सर्विस में जाने वाली परीक्षा दी और उसमें पास होने के बाद फाइटर पायलट बन गईं। फिलहाल अवनि एयरफोर्स के जामनगर एयरबेस में हैं। इतिहास रचने के बाद पिता से उनकी बात नहीं हुई है। फिर अवनि के पिता को बेटी के कारनामे का पता कैसे चला, इस पर दिनांकर चतुर्वेदी ने हंसते हुए कहा, "बीती रात आपकी ही तरह एक मीडियाकर्मी का फोन आया था। तब मुझे मेरी बेटी के कारनामे का पता चला। हालांकि वो एक दिन सफल होगी, इसका मुझे हमेशा से भरोसा था।'
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