देशभर में कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों के बीच बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन पर मंडराये संशय के बादल अब छंटते नजर आ रहे हैं। कई राज्यों ने सूबे में बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। अब राजस्थान सरकार ने भी प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को निरस्त करने का फैसला किया है।
राजस्थान बोर्ड : आरबीएसई 10वीं 12वीं की परीक्षाएं रद्द, मंत्री परिषद की बैठक में हुआ फैसला
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ डीपी जारोली ने बताया कि राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में करीब साढ़े 21 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ डीपी जारोली ने बताया कि राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में करीब साढ़े 21 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। 14 अप्रैल को सीबीएसई के फैसले के आधार पर परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं थीं। राज्य में 15 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू करने की तैयारी है। इस संबंध में शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। कोरोना महामारी के कारण राज्य में अब 125 शिक्षकों की मौत हो चुकी है। ऐसे में परीक्षाओं का आयोजन संभव नहीं है।
इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सीबीएसई और आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाओं के निरस्त किए जाने का निर्णय किया गया था। इस फैसले के बाद कई राज्यों में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं को लेकर दोबारा मंथन शुरू हो गया है। राज्यों में भी इम्तिहान रद्द करने की मांग अब फिर से जोर पकड़ने लगी थी। इसी क्रम में राजस्थान में भी आवाज उठाई जा रही थी। राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पूर्व में स्थगित की गईं थीं।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री डोटासरा ने मंगलवार शाम को इसी संबंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से फोन पर चर्चा की थी। इस दौरान परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बन चुकी है। लेकिन आधिकारिक तौर पर अंतिम निर्णय बुधवार शाम की मंत्री परिषद की बैठक में लिया गया। वहीं, ऐसा भी माना जा रहा है कि इसी बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा रीट 2021 और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी निर्णय किया जा सकता है।
लाखों अभ्यर्थी कोरोना महामारी के दौरान परीक्षाओं के आयोजन का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार की बैठक में यही कहा था कि छात्रों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे भय और तनाव के माहौल में हमारे युवाओं को परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। पीएम ने कहा कि देश भर में कोविड-19 महामारी की स्थिति लगातार बदल रही है।
हालांकि, देश में नए मामलों की संख्या कम हो रही है और कुछ राज्य प्रभावी सूक्ष्म-नियंत्रण के माध्यम से स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, कुछ राज्यों ने अभी भी तालाबंदी का विकल्प चुना है। ऐसे में छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं।
कमेंट
कमेंट X