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देश में सिर्फ बक्सर जेल में ही क्यों बनते हैं फांसी के फंदे?

Mon, 16 Dec 2019 07:49 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 16 Dec 2019 07:49 AM IST
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Nirbhaya case update How and Why fansi ka fanda necks noose if made in Buxar Central jail
बक्सर केंद्रीय कारागार - फोटो : BBC

जिस तरह फांसी की सजा विरले ही किसी को मिलती है, उसी तरह फांसी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला फंदा भी पूरे देश में केवल एक ही जगह बनता है। वो है बिहार का बक्सर केंद्रीय कारागार (Buxar Central Jail)।



हाल ही में खबर आई कि बक्सर जेल प्रशासन को एक बार फिर से 10 फांसी के फंदे बनाने के ऑर्डर मिले हैं। लेकिन सवाल ये कि आखिर देश में फांसी के फंदे सिर्फ बक्सर सेंट्रल जेल में ही क्यों बनते हैं? क्या कहीं और ऐसे फंदे नहीं बनाए जा सकते? आगे पढ़ें इन सवालों के जवाब।

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जेल सुपरिटेंडेंट विजय कुमार - फोटो : BBC

बक्सर जेल के सुपरिटेंडेंट विजय कुमार अरोड़ा बीबीसी से कहते हैं, 'क्योंकि इंडियन फैक्ट्री लॉ के हिसाब से बक्सर सेंट्रल जेल को छोड़ दूसरी जगहों पर फांसी के फंदे बनाने पर प्रतिबंध है। पूरे भारत में इसके लिए केवल एक ही जगह पर मशीन लगाई गई है और वो सेंट्रल जेल बक्सर में। ये आज से नहीं बल्कि अंग्रेजों के समय से है।'

लेकिन अंग्रेजों ने मशीन वहीं क्यों लगाई?

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फांसी का फंदा - फोटो : social media
  • जेल सुपरिटेंजेंट अरोड़ा कहते हैं, 'ये तो पूरे विश्वास के साथ नहीं बता सकते कि उन्होंने मशीन यहीं क्यों लगाई। मेरी जो समझ है और जो मैंने यहां आकर जाना है, उसके आधार पर इतना जरूर कहूंगा कि यहां के मौसम की इसमें अहम भूमिका है।'
  • 'बक्सर सेंट्रल जेल गंगा के किनारे है। फांसी का फंदा बनाने वाली रस्सी बहुत मुलायम होती है। उसमें प्रयोग किए जाने वाले सूत को अधिक नमी की जरूरत होती है। हो सकता है कि गंगा के किनारे होने के कारण ही मशीन यहीं लगाई गई।'
  • 'हालांकि अब सूत को मुलायम और नम करने की जरूरत नहीं पड़ती। सप्लायर्स रेडिमेड सूत ही सप्लाई करते हैं।'

कैसे बनता है फांसी का फंदा

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fansi - फोटो : Social Media
  • जेल सुपरिटेंडेंट विजय कुमार अरोड़ा के अनुसार फांसी का फंदा बनाने के लिए जिस सूत का इस्तेमाल होता है, उसका नाम J34 है। 
  • पहले यह सूत विशेष तौर पर पंजाब से मंगाया जाता था, लेकिन अब सप्लायर्स ही देते हैं।
  • अरोड़ा बताते हैं, 'यह मुख्य रूप से हाथ का काम है। मशीन से केवल धागों को लपेटने का काम होता है। 154 सूत का एक लट बनाया जाता है। छह लट बनते हैं। इन लटों से 7200 धागे या रेशे निकलते हैं। इन सभी धागों को मिलाकर 16 फीट लंबी रस्सी बनती है।'
  • जेलर सतीश कुमार सिंह के मुताबिक फंदा बनाने का अंतिम चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है।
  • वो कहते हैं, 'जब एक बार हम यहां से रस्सी बनाकर भेज देते हैं, तो फिर उसकी फिनिशिंग का काम होता है। इसमें रस्सी को मुलायम और नरम बनाना शामिल है। क्योंकि नियमों के मुताबिक फांसी के फंदे से केवल मौत होनी चाहिए। चोट का एक भी निशान नहीं रहना चाहिए।'

कौन बनाता है फांसी का फंदा

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प्रतीकात्मक तस्वीर
  • बक्सर जेल के कैदी ही इसे बनाने का काम करते हैं।
  • इसके लिए बक्सर जेल में कर्मचारियों के पद सृजित हैं। वर्तमान में चार कर्मी इन पदों पर काम कर रहे हैं। जेलर सतीश कुमार सिंह बताते हैं कि कर्मी फंदा बनाने के लिए कैदियों को केवल निर्देशित करते हैं या प्रशिक्षित करते हैं।

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क्या फांसी की सजा पाए कैदी भी बना सकते हैं फंदा?

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