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अंतरिक्ष में भारत का अपना स्टेशन, इसरो उठाने जा रहा है ये बड़ा कदम

Fri, 04 Oct 2019 07:56 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Fri, 04 Oct 2019 07:56 AM IST
सार

  • चंद्रयान-2 और गगनयान के साथ-साथ इस बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी में जुटा इसरो
  • अंतरिक्ष में करने जा रहा है ऐसा प्रयोग जो पहले कभी नहीं किया

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ISRO to conduct spadex docking experiment for Indian Space Station after Chandrayaan 2, K Sivan said
के. सिवन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Research Organisation) इस समय एक साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) से संपर्क की कोशिश में हार नहीं मानी है। वहीं दूसरी ओर भारत के पहले मानव मिशन गगनयान (Gaganyaan) की भी तैयारी जारी है। इस बीच अब इसरो प्रमुख के. सिवन (ISRO Chief K Sivan) ने एक और बड़े प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी है। यह ऐसा है जो इसरो ने पहले कभी नहीं किया।

ISRO to conduct spadex docking experiment for Indian Space Station after Chandrayaan 2, K Sivan said
के. सिवन - फोटो : ISRO

डॉ. के. सिवन ने अंतरिक्ष में भारत के अपने स्टेशन (Space Station) के बारे में बात की है। कुछ महीने पहले के. सिवन ने बताया था कि भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने वाला है। अब इसके लिए इसरो अगले साल स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (Spadex - Space Docking Experiment) करने जा रहा है।

कैसा होगा ये प्रयोग, आगे पढ़ें

ISRO to conduct spadex docking experiment for Indian Space Station after Chandrayaan 2, K Sivan said
नासा के एक डॉकिंग एक्सपेरिमेंट की तस्वीर - फोटो : NASA

इस प्रयोग के लिए इसरो दो सैटेलाइट्स को एक पीएसएलवी रॉकेट (PSLV Rocket) की मदद से अंतरिक्ष में भेजेगा। ये दो सैटेलाइट मॉड्यूल इस तरह तैयार किए जाएंगे, कि ये अंतरिक्ष में रॉकेट से बाहर आने के बाद एक दूसरे से जुड़ सकें। यही सबसे जटिल प्रक्रिया भी होगी।

स्पेस स्टेशन के लिए क्यों जरूरी है ये प्रयोग, आगे पढ़ें

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ISRO to conduct spadex docking experiment for Indian Space Station after Chandrayaan 2, K Sivan said
इसरो प्रमुख के. सिवन - फोटो : Social Media

इसरो प्रमुख के अनुसार जुड़ने की ये प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसे इमारत बनाने के लिए एक ईंट से दूसरी ईंट को जोड़ना। छोटी-छोटी चीजें जुड़कर बड़ा आकार बनाती हैं। स्पेस स्टेशन बनाने के लिए भी ये प्रक्रिया सबसे अहम है।

इस प्रयोग की सफलता से ही पता चलेगा कि हम स्पेस स्टेशन में जरूरी वस्तुओं और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित तरीके से पहुंचा सकेंगे या नहीं। बता दें कि पहले 2025 तक ये रॉकेट छोड़ने की योजना थी।

आगे पढ़ें, ISS बनाने में कितना समय लगा था

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ISRO to conduct spadex docking experiment for Indian Space Station after Chandrayaan 2, K Sivan said
ISS - फोटो : nasa

इस वक्त इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) कार्य कर रहा है जिसे पांच देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर बनाया है - अमेरिका (NASA), रूस (ROSCOSMOS), जापान (JAXA), यूरोप (ESA) और कनाडा (CSA)। इन सभी को मिलकर आईएसएस बनाने में करीब 13 साल लगे थे। इसके लिए भी डॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। ISS के लिए कुल 40 बार डॉकिंग की गई थी।

इस प्रयोग की सबसे जटिल प्रक्रिया होगी अंतरिक्ष में दो सैटेलाइट्स की गति कम कर उन्हें एक-दूसरे से जोड़ना। क्योंकि अगर गति कम नहीं हुई, तो वे आपस में टकरा जाएंगे। इस प्रयोग के लिए इसरो को सरकार ने फिलहाल 10 करोड़ रुपये दिए हैं। 

ये भी पढ़ें : Chandrayaan 2: क्यों बिगड़ी 'विक्रम' की लैंडिंग, ISRO वैज्ञानिक ने बताए ये बड़े कारण

...तो क्या टल जाएगा गगनयान मिशन? आगे पढ़ें

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